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तिघरा में स्थापित होगा गिद्ध व्याख्या केन्द्र

गिद्धों की गणना से पहले कल होगी कार्यशाला

ग्वालियर। वन विहार भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण केन्द्र की तर्ज पर ग्वालियर में भी तिघरा स्थित वन विभाग की ईको पार्क में गिद्ध व्याख्या केन्द्र स्थापित किया जाएगा, लेकिन यहां सजीव गिद्धों की जगह विभिन्न प्रजाति के गिद्धों के चित्र प्रदर्शित कर लोगों को गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरुक करने के प्रयास किए जाएंगे।
यहां बता दें कि वन विहार भोपाल सहित देश भर में केवल छह स्थानों पर गिद्ध संरक्षण केन्द्र स्थापित हैं, जहां गिद्धों को संरक्षित क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण में रखकर उन्हें सुरक्षित आहार दिया जा रहा है। साथ ही इनका प्रजनन कराकर इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी तर्ज पर वन विभाग द्वारा ग्वालियर में तिघरा स्थित ईको पार्क में गिद्ध व्याख्या केन्द्र स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन यहां जीवित गिद्धों की बजाय एक बड़े हॉल में पोस्टरों के माध्यम से विभिन्न प्रजाति के गिद्धों के चित्र, उनकी प्रकृति और गिद्ध क्यों आवश्यक हैं आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। यहां वन विभाग के गिद्ध विशेषज्ञ कर्मचारी भी तैनात रहेंगे, जो तिघरा में आने वाले पर्यटकों को गिद्धों के संबंध में विस्तृत जानकारी देकर उन्हें गिद्धों के संरक्षण व संवर्धन के प्रति जागरुक करने का काम करेंगे।
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. इंग्ले देंगे प्रशिक्षण
गिद्धों की प्रकृति और उनके संरक्षण व संवर्धन को लेकर 18 जनवरी को सिटी सेन्टर स्थित मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के सभागार में वृत्त स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. पुरुषोत्तम इंग्ले वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे, जिसमें डॉ. इंग्ले मुख्य रूप से यह बताएंगे कि किस प्रजाति के गिद्ध को कैसे पहचानें, प्रकृति में गिद्ध क्यों आवश्यक हैं और उनका संरक्षण व संवर्धन कैसे संभव है।

60 स्थानों पर 23 को होगी गिद्धों की गणना

मुख्य वन संरक्षक राजेश कुमार ने बताया कि मध्यप्रदेश में पहली बार दो चरणों में 23 जनवरी और उसके बाद मई में गिद्धों की गणना की जाएगी। इसके लिए ग्वालियर वन वृत्त में आने वाले पांच जिलों ग्वालियर, दतिया, भिण्ड, मुरैना, श्योपुर में 80 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां अक्सर गिद्ध देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि गिद्ध अक्सर सुबह 7 से 9 बजे तक अपने आवास स्थलों पर ही मौजूद रहते हैं, इसलिए इनकी गणना सुबह 7 से 9 बजे के बीच ही कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि गिद्ध पतझड़ के दौरान अण्डे देते हैं और मई में अण्डों से बच्चे निकलते हैं, इसलिए दूसरी बार मई में भी गिद्धों की गिनती कराई जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि इनकी वंश वृद्धि किस गति से हो रही है।

अंचल में मौजूद हैं छह प्रजाति के गिद्ध
मुख्य वन संरक्षक राजेश कुमार के अनुसार ग्वालियर व चम्बल अंचल में राज्य गिद्ध, सफेद गिद्ध, काला गिद्ध, चमर गिद्ध सहित छह प्रजाति के गिद्ध मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि दतिया जिले के सैंवड़ा वन परिक्षेत्र में उचाड़ की पहाड़ी पर वर्तमान में करीब आधा सैकड़ा गिद्ध मौजूद हैं, जहां गिद्धों के अण्डे भी देखे गए हैं। इससे पता चलता है कि इनकी वंश वृद्धि भी हो रही है।
डाइक्लोफेनैक पर सख्ती से लगाएंगे रोक
मुख्य वन संरक्षक राजेश कुमार ने बताया कि पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाला दर्द निवारक डाइक्लोफेनैक इंजेक्शन गिद्धों के लिए घातक साबित हो रहा है। उक्त इंजेक्शन लगे पशु की मौत के बाद उसका मांस खाने वाले गिद्ध की तत्काल मौत हो जाती है। हालांकि शासन ने जुलाई 2008 में ही इस इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। बावजूद इसके पशुओं के इलाज में उक्त इंजेक्शन का आज भी इस्तेमाल हो रहा है। गिद्धों की गणना के बाद डाइक्लोफेनैक इंजेक्शन के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाने और इसके स्थान पर अन्य उपयुक्त दवा के इस्तेमाल के लिए पशु चिकित्सकों को प्रेरित करने के प्रयास किए जाएंगे।

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