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करोड़ों की खरीदी गाडिय़ों में मरम्मत के नाम पर होते लाखों खर्च

*कुटेशन पर चल रहा मरम्मत कार्य
*रजिस्टर्ड कंपनियों को रिपेयरिंग का नहीं दिया काम


दीपचन्द्र चौबे/झांसी। नगर निगम के गैरिज के कार्य में लाखों रुपये गाडिय़ों के मरम्मत कार्य में खर्च किये जाते हैं। लेकिन इन गाडिय़ों के लिये रिपेयरिंग कार्य हेतु रजिस्टर कंपनी द्वारा गाडिय़ों के रिपेयरिंग कार्य नहीं किया जा रहा है, जबकि रिपेयरिंग कार्य कुटेशन के आधार पर चल रहा है।
इस कार्य के लिये मैसर्स राम एण्ड कंपनी, पीटीपीपी परीछा ने अपना कुटेशन जीपीएस मशीन की गाडिय़ों के लिये अपना कंपनी कुटेशन नगर निगम को दिया गया था जिसमें इस कार्य के लिए उक्त कंपनी को सम्मिलित नहीं किया गया। नगर निगम में नगर की सफाई व्यवस्था व अन्य कार्यों के लिये करोड़ों की गाडिय़ां खरीदी जा रही हैं लेकिन इनकी देखरेख व मरम्मत कार्य के लिये कोई व्यवस्था नहीं है जबकि अभी कुछ माह पूर्व एक करोड़ से अधिक की लागत की गाड़ी खरीदी गई जिसका कार्य शहर की सड़कों को साफ करना है। लेकिन उक्त मशीन कुछ ही दिनों में खराब हो गई और उसे पुन: मरम्मत कार्य करके ठीक किया गया। लेकिन इन करोड़ों की मशीनों को मरम्मत कार्य हेतु किसी कंपनी के द्वारा कार्य नहीं कराया जाता, जबकि प्राइवेट तौर पर कुटेशन के माध्यम से कार्य कराये जा रहे हैं। इस मशीन के लिये नगर निगम में एक गैरिज बनाया जा रहा था, लेकिन गैरिज का कार्य कुछ दिन चलने के बाद अधूरा बना छोड़ दिया गया।
करोड़ों की लागत से खरीदी गई गाडिय़ों के लिये गैरिज की व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात में यह गाडिय़ां जंग खाने के कारण खराब हो जाती है। जिससे नगर निगम को करोड़ों का नुकसान प्रतिवर्ष हो रहा है। इस व्यवस्था के लिये नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है। जबकि प्रतिवर्ष में करोड़ों की लागत की गाडिय़ां सफाई व्यवस्था व अन्य कार्य के लिये खरीदी जाती हैं और यह गाडिय़ां दो-तीन माह में ही खराब होने लगती हैं इस व्यवस्था के लिये दतिया गेट स्थित खंतियों के पास गैरिज बनाया गया है लेकिन इस गैरिज में नगर निगम की गाडिय़ां खड़ी करने के लिये पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
हालांकि एक गैरिज हॉल गाडिय़ों के रिपेयरिंग के लिये होना चाहिए। नगर निगम से पूर्व नगर पालिका के समय में नगर पालिका की पुरानी इमारत में गाडिय़ों को सुधारने के लिये व धुलाई के लिये पूरे इंतजाम थे लेकिन इन इंतजामों को ध्वस्त कर दिया गया। कूड़ा ढोने वाली गाडिय़ां जिसमें मशीन रहित डम्पर, टै्रक्टर, छोटा मिनीडोर व अन्य गाडिय़ां चल रही हैं। लेकिन इन गाडिय़ों की देखरेख नहीं होती है। एक माह में खरीदी गई गाडिय़ां वर्षों पुरानी लगने लगती है। गाडिय़ों के टायर दो माह में उतर जाते हैं व अन्य खराबियां भी आ जाती हैं। इसके लिये गैरिज में व्यवस्था होनी चाहिए थी लेकिन करोड़ों का बजट होने के बाद भी करोड़ों की खरीदी गाडिय़ों पर नगर निगम द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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