Home > Archived > अधिकारी नहीं देते ध्यान, योजनाओं पर नहीं होता काम

अधिकारी नहीं देते ध्यान, योजनाओं पर नहीं होता काम

वर्षों पुराने हैं लीकेज, नहीं हुआ सुधार, तिघरा का 40 प्रतिशत पानी बह जाता है नालियों में

ग्वालियर। शहर की प्यास बुझाने वाले तिघरा जलाशय से मिलने वाले पानी का 40 फीसदी हिस्सा आमजनता एवं पीएचई विभाग की लापरवाही से शहर की नालियों में बह जाता है। हालांकि कई बार बैठकों में इस लीकेज को रोकने की हिदायतें भी अधिकारियेां को जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों नेे दी है साथ ही जनता से भी अपील की जाती रही है लेकिन इन सभी प्रयासों का नतीजा शून्य ही रहा है।
ङ्क्षसधिया राजवंश द्वारा शहर की जनता को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्धेश्य से लगभग नौ दशक पहले बनाया गया तिघरा जलाशय आज भी ग्वालियरवासियों की प्यास बुझा रहा है। लेकिन विगत दो सालों से हो रही अल्पवर्षा के कारण इस जलाशय से शहरवासियों को प्रतिदिन आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है, यदि जलाशय से लोगों के घरों तक पहुंचने से पहले होने वाले पानी की बर्वादी (लीकेज)को रोक दिया जाए तो समस्या का हल काफी आसानी से हो सकता है। हांलाकि इसे लेकर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की कई बार बैठकें भी हुई हैं लेकिन हर बार पीएचई विभाग को विभिन्न आदेश देने के बाद सबकुछ भुला दिया गया।

प्रतिदिन पानी आपूर्ति की स्थिति

तिघरा का वर्तमान जलस्तर 734.50 फुट है, जबकि इसकी भराव क्षमता 738 फुट है। तिघरा से शहर को प्रतिदिन 170 एमसीएफटी पानी सप्लाई किया जाता है। जबकि एक पानी की टंकी में यह 155 एमसीएफटी पहुंचता है। इसके बाद सप्लाई के दौरान यह लोगों द्वारा खुले छोड़ दिए गए नलों से बह जाता है।

तिघरा जलाशय से ही शुरू होता है लीकेज
करीब नौ दशक पुराना तिघरा जलाशय समय के सााथ जीर्णशीर्ण होने लगा है। इस पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण जलाशय में कई जगह दरारें आ चुकी है जिसके कारण उनमें से बहकर प्रतिदिन एक करोड़ लीटर से अधिक पानी व्यर्थ में बह जाता है।

ऐसे हो सकती है तिघरा की मरम्मत
दुनिया के सबसे खुबसूरत शहरों में से एक वैनिस जो अपनी सदियों पुरानी इमारतों, पुलों के लिए मशहूर है। इस शहर का निर्माण करीब चार सदी पहले लोगों ने समुद्र में एक नया भूभाग बनाकर की थी। इस शहर को आपस में जोडऩे के लिए नहरों का जाल बिछा हुआ है । यहां पर सदियों पुराने पुल एवं इमारतें है इनकी नींव में अक्सर पानी के दबाव के कारण दरारें आ जाती है। इन दरारों को भरने के लिए यहां पर एक वाटरप्रूफ सीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है जो कि कई दशकों तक यथावत रहती है। ऐसा ही इंतजाम ग्वालियर में तिघरा जलाशय की दरारों को भरने के लिए किया जा सकता है।

पानी की लाइनों से चोरी
तिघरा जलाशय ग्वालियर शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर है यहां तक पानी लाने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई हैं। यह लाइनें भी काफी पुरानी हो चुकी हैं साथ ही इसमें ग्रामीणों ने छेद कर दिए है। इनसे निकलने वाले पानी से कई जगह पर खेतों में सिंचाई की जाती है। वहीं कई जगहों पर पानी व्यर्थ बहता रहता है।
सबसे ज्यादा बर्बादी नलों से
शहरवासियों द्वारा नलों में टोटियां नहीं लगाने के कारण कुल पानी का करीब तीस फीसदी बर्वाद होकर नालियों में बह जाता है।

इन्होंने कहा
शहरवासियों को प्रतिदिन पानी देने के लिए नगर निगम अमृत अटल योजना में शामिल होने का प्रयास कर रहा है। इस योजना के तहत शहर में पानी की लाइनें बिछाई जाएंगी एवं घरों में पानी के मीटर लगाए जाएंगे। साथ ही लाइन लॉस को बेहद कम कर दिया जाएगा।
आर.एल.एस मौर्य
अधीक्षण यंत्री
पीएचई

Share it
Top