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अब्दुल कलाम के जीवन की 15 अहम बातें, जिन्हें आप भी करेंगे सलाम

अब्दुल कलाम के जीवन की 15 अहम बातें, जिन्हें आप भी करेंगे सलाम

नई दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सोमवार शाम दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। 83 साल के डॉ. कलाम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, शिलांग में लेक्चर दे रहे कि उसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वे बेहोश हो गए, लेकिन शाम 7:45 बजे अस्पताल ने उनके निधन की घोषणा की।
अब्दुल कलाम के जीवन की 15 अहम बातें:-
- कलाम का 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गांव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में जन्म हुआ था और उनकी माता एक गृहणी थी। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम था। उनका बचपन आसान नहीं था, उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
- इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराए पर दिया करते थे। अपने गरीब परिवार की मदद के लिए वे स्कूल के बाद अखबारें बेचने का काम करते थे।
- कलाम को पढ़ाई से बेहद लगाव था। वे पढ़ाई को किसी धर्म-संप्रदाय से बड़ा मानते थे। यही वजह थी कि वे सुबह की नमाज के पहले मैथ्स पढ़ते थे।
- कलाम का पसंदीदा विषय गणित और भौतिकी थे और अंत में उन्होंने अपने जीवन में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग को लिया।
- एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उनकी रुचि और काम ने उन्हें भारत के असैनिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के करीब ले आया।
- बैलिस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास पर अपने काम के लिए कलाम को मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा।
- मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम को 1982 में डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने तब के रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया। इसी की बदौलत उन्होंने भारत के लिए पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग, ब्रह्मोस समेत कई मिसाइल बनाई। वो कलाम ही थे जिनके डायरेक्शन में देश को पहली स्वदेशी मिसाइल मिली।
- 74 साल की उम्र में किसी लड़ाकू विमान में सफर करनेवाले वे पहले भारतीय राष्ट्रपति थे। पुणे के लोहेगांव स्थित वायुसेना के हवाई अड्डे से 8 जून 2006 को कलाम ने भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल सुपरसोनिक लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई में पूरे 30 मिनट तक उड़ान भरी।
- इसरो में वह भारत के पहले अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहन कार्यक्रम के अग्रदूतों में से एक थे।
- कलाम को पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
- वह भारत के एक विशिष्ट वैज्ञानिक हैं, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है।
- एक विपुल लेखक, कलाम परमाणु भौतिकी से आध्यात्मिक अनुभवों को लेकर विभिन्न विषयों पर 15 पुस्तकें आसपास के लेखक है।
- उनकी आत्मकथा विंग्स आफ फायर पहले अंग्रेजी में प्रकाशित की गई थी। बाद में इसे 13 भाषाओं में अनुवाद किया गया है, जिनमें फ्रेंच और चीनी भाषा भी शामिल है। इसमें अब्दुल कलाम के बचपन से लेकर लगभग 1999 तक के जीवन सफर के बारे में बताया गया है।
- डॉक्टर कलाम ने साहित्यिक रूप से भी अपने शोध को चार उत्कृष्ट पुस्तकों में समाहित किया है, जो इस प्रकार हैं- ‘विंग्स ऑफ फायर’, ‘इंडिया 2020- ए विजन फॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘माई जर्नी’ तथा ‘इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’। इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
- डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। 18 जुलाई 2002 को डॉक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा ‘भारत का राष्ट्रपति’ चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इनका कार्याकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। उन्हें ‘लोगों का राष्ट्रपति’ भी कहा जाता है।

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