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क्रियान्वयन, अनुमोदन और संचालन सब कुछ एसपीवी करेगी स्मार्ट सिटी की निगरानी

*लिमिटेड कम्पनी के रूप में होगा गठन ४50-50 हिस्से के होंगे अंशधारक

लाजपत राय अग्रवाल / ग्वालियर। स्मार्ट सिटी का ढोल पिछले एक साल से बजाया जा रहा है, लेकिन अब पता चल रहा है कि नगर निगम को स्मार्ट बनने के लिए प्रस्ताव बनाने की जिम्मेदारी रहेगी, लेकिन बाद में सब कुछ जिम्मा एसपीवी यानि स्पेशल परपज व्हीकल यानि विशेष प्रयोजन साधन के जिम्मे रहेगा। अध्यक्ष के रूप में एसपीवी का संचालन करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी जाएगी।
देश भर में 100 स्मार्ट सिटी बनाई जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस घोषणा के साथ ही नगर निगम अधिकारियों ने स्मार्ट बनने के लिए जोर आजमाइश शुरू कर दी है, लेकिन 25 व 26 जून को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में साफ हुआ कि स्मार्ट सिटी, अमृत सिटी की निगरानी, क्रियान्वयन, अनुमोदन तथा स्मार्ट के अंतर्गत चलने वाले सभी प्रकार के कार्यों के लिए निधियां जारी करने का जिम्मा इसी एसपीवी को सौंपा गया है।

मंत्रालय के हिसाब से खर्च होगी राशि
विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) नगर स्तर पर कंपनी अधिनियम 2013 के अन्तर्गत गठित लिमिटेड कंपनी होगी। केन्द्र, राज्य और स्थानीय निकाय 50-50 प्रतिशत अंशधारक होने के साथ इसकी शुरुआत करेंगे। इस लिमिटेड कंपनी में निजी तथा वित्तीय संस्थाओं से भी अंश लेने पर विचार हो रहा है। एसपीवी के साथ खास बात यह है कि शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली स्मार्ट सिटी की राशि एसपीवी में एक अलग अनुदान निधि के रूप में रखी जाएंगी। इसका उपयोग मंत्रालय की शर्तों के अधीन ही किया जाएगा।

त्रिस्तरीय होगी निगरानी

स्मार्ट सिटी के साथ जुड़ा यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि केन्द्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर तीन प्रकार की समितियों द्वारा इस पर नजर रखी जाएगी। जहां तक स्थानीय समिति का सवाल है तो उसमें महापौर, सांसद, विधायक, जिलाधीश, एसपीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्थानीय युवा, तकनीकी विशेषज्ञ तथा संबंधित क्षेत्र के निम्न क्षेत्र से एक व्यक्ति को शामिल किया जाएगा।
एसपीवी यह करेगी काम:-
एसपीवी के गठन के बाद द्वितीय चरण की प्रतिस्पर्धा के लिए स्मार्ट सिटी मिशन के अनुकूल ब्लू प्रिंट तथा विस्तृत रोडमैप बनाने की जिम्मेदारी होगी।
केन्द्र, राज्य और स्थानीय निकायों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखते हुए बाहरी हितधारियों के साथ भी समन्वय बनाना होगा। स्मार्ट सिटी प्रस्ताव (एससीपी) के लिए डीपीआर तैयार करवाना, प्रक्रियाओं को साझा करना तथा स्मार्ट तरीके से समाधान करना।
सभी प्रकार के निर्माणों का अवलोकन के साथ ही केन्द्र, राज्य और स्थानीय निकायों के साथ हैंडहोल्डिंग (हाथ बंटाना) में सहायता करना। वित्तीय साधनों का उपयोग तथा जोखिम कम करने की तकनीकी पर काम करना।

''शहरी विकास मंत्रालय की बैठक में स्पेशल परपज व्हीकल एसपीवी का जिक्र हुआ है। इसे एक लिमिटेड अंशधारक कम्पनी का दर्जा प्राप्त होगा।''
विवेक शेजवलकर
महापौर, ग्वालियर

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