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कलेक्ट्रेट के सामने लगता है असामाजिक तत्वों का जमावड़ा

ग्राउण्ड में फूटे कांचों से चोटिल हो रहे खिलाड़ी


शिवपुरी | शहर में इन दिनों जिलाधीश कार्यालय के ठीक सामने पोलोग्राउण्ड का मैदान बेतरतीब अव्यवस्थाओं और देर शाम जमने वाली शराब की महफिलों के चलते अव्यवस्था की चपेट में है। यहां सुबह घूमने आने वाले लोग कांच की फूटी पड़ी बोतलों से चोटिल होते हैं, वहीं मैदान में खेलने आने वाले नौनिहाल भी परेशान रहते हैं।
शहर के मध्य मौजूद एकमात्र खेल मैदान अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करोड़ों रुपये खेल विभाग द्वारा खेल सामग्री पर खर्च किए जा रहे हैं, परंतु मैदानी स्तर पर इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। खेल विभाग द्वारा इस मैदान में न तो फुटबॉल नेट लगाए गए हैं और न ही क्रिकेट हेतु कोई अच्छी पिच तैयार की गई। विभाग की लापरवाही के कारण इस मैदान के चारों ओर लगी जालियां और गेट भी टूटते जा रहे हैं। मैदान के एक तरफ बने जीने जहां दर्शक बैठकर खेलों का लुत्फ उठाया करते हैं, वह भी जीर्ण-शीर्ण होते जा रहे हैं। कई जगह जीनों को हटाकर सपाट मैदान कर दिया गया है।
मैदान में घुसने के लिए महल के सामने वाले दरवाजे भी गायब हो चुके हैं, जिसके कारण गाय, बकरी, सुअर आदि पशु मैदान में घूमते नजर आते हैं। अनेक बार खेलों के दौरान ही पशु मैदान में प्रवेश कर जाते हैं जिन्हें खिलाडिय़ों द्वारा ही अपना खेल रोककर बाहर करना पड़ता है।
शाम होते ही जम जाती हैं महफिलें
शाम होते ही शराबी पोलो ग्राउण्ड की दीवार पर बैठकर शराब गटकने का आनंद देखे जा सकते हैं। यह शराबी खाली बोतलों को मैदान मेंं फेंककर चले जाते हैं। इनमें अनेक कांच की बोतलें मैदान में गिरकर फूट जाती हैं जिसके कारण सुबह घूमने वाले लोग अनेक बार कांच से चोटिल हो चुके हैं।। पोलो ग्राउण्ड की बाउण्ड्री के नीचे के पत्थर भी अज्ञात लोगोंं द्वारा निकाल लिये गये हैं जिसके कारण ऊपर से मजबूत दिखने वाली इसकी दीवार अंदर से खोखली हो चुकी है जो कभी भी बाहर या अंदर की तरफ गिर सकती है। खासबात तो यह है कि बाउण्ड्री के बाहर आड़तिये माल भी खरीदते हैं जो इस दीवार के ऊपरी हिस्से से अपनी तिरपाल को बांधकर अपने लिये छाया करते हैं। अगर जल्द ही इस दीवार को दुरुस्त नहीं कराया गया तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
पीने के पानी की नहीं है व्यवस्था
खेल में मैदान कलेक्ट्रेट परिसर के ठीक सामने है बाबजूद इसके यहां आने वाले खिलाडिय़ों को पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। गर्मी के मौसम में कुछ देर खेलने के बाद ही छोटे-छोटे बच्चों को प्यास लगने लगती है, परंतु इस मैदान में पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण। बच्चे एवं बड़े पानी पीने के लिए या तो कलेक्ट्रेट के अंदर जाते हैं या फिर बाहर से पैसों से पानी का पाउच खरीदकर पीते हैं।
कोनों में जमा होने लगी गंदगी
पोलोग्राउण्ड के पास ही अस्पताल होने के कारण इसके एक कोने पर काफी गंदगी जमा रहती है इसलिए इस कोने पर बच्चे नहीं खेलते इसके ही पास में कोर्ट रोड की तरफ वालस कोना पूरी तरह से साफ नहीं है जिसमें घास खड़ी है और यहां बने गड्ढ़ों में कचरा भी डला रहता है जिससे यहां आने वाले बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां गंदगी होने से यह खेल का मैदान भी गंदा होने पर मजबूर है क्योंकि यहां प्रतिदिन सफाई तो होती नहीं इसलिए जब खिलाड़ी मैदान में आते है वह ही अपने स्थान को साफ कर खेलने लगते है जबकि ग्राउण्ड के कोनों पर जमा होने वाली गंदगी पर किसी का ध्यान नहीं है।

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