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लाखों खर्च फिर भी प्लेटफार्म पर गंदगी

कबाड़ा हो रही है सफाई करने वाली मशीन

ग्वालियर। रेलवे स्टेशन पर होने वाली गंदगी की साफ-सफाई के लिए रेलवे द्वारा लाखों रूपए खर्च कर स्टेशन पर छह मशीनें पहुंचाई गई थीं। लेकिन इन मशीनों में छोटी-मोटी कमी के चलते इन सभी छह मशीनों को कबाड़ खानें में डाल दिया गया है। रेलवे अधिकारी इन मशीनों को सुधरवाने के बजाय करोड़ों रूपए का सफाई ठेका देने में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं। खास बात तो यह है कि इन मशीनों की खरीदारी कर सीधे स्टेशन पर भेज दिया गया। आला अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन से उनकी आवश्यक्ता जानना भी मुनासिब नहीं समझा और उससे भी खास बात यह रही कि जब लाखों रूपए की मशीनरी साफ-सफाई के लिए भेजी गई तो फिर स्टेशन की सफाई का ठेका निजी कम्पनियों को क्यों दिया गया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2009-10 में रेलवे स्टेशन की सफाई के लिए मुख्यालय द्वारा फैसला लिया गया कि ए एवं ए-1 श्रेणी के स्टेशनों के प्लेटफार्म की साफ-सफाई अधुनिक मशीनों (मैकेनाईज क्लीनिंग)द्वारा किया जाएगा। इसके लिए झांसी मण्डल से अधिकारियों ने प्रपोजल तैयार कर एक बड़ी खरीदारी करते हुए करीब 25 से 30 लाख रूपए खर्च कर छह मशीनों की खरीद की, और इन मशीनों को सीधे स्टेशन पर भेज दिया। मशीनें जब स्टेशन पर पहुंच गई तब स्थानीय प्रशासन को इस बात की जानकारी हुई कि अब प्लेटफार्म की सफाई इन मशीनों द्वारा होगी। शुरूआत में करीबन छह माह तक इन मशीनों का उपयोग करते हुए अच्छे ढ़ंग से साफ-सफाई की गई। लेकिन छह माह गुजरते ही मशीन में कुछ न कुछ खराबी आ गई तो इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन द्वारा झांसी मण्डल को दी गई। लेकिन मण्डल के अधिकारियों ने मशीनों के सुधारवाने में रूचि न दिखाते हुए वर्ष 2011 में जबलपुर की एक निजी कम्पनी को सवा करोड़ रूपए में प्लेटफार्म सफाई का ठेका दे दिया और वर्ष 2015 में करीबन दो करोड़ रूपए में सफाई का ठेका दिया जा रहा है।
मशीन सुधार के लिए फंड नहीं ठेका दिया
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जब भी मण्डल के अधिकारियों को मशीन के सुधार के लिए कहा गया तो जबाब हर वार यही मिला कि फंड उपलब्ध नहीं है। जबकि प्लेटफार्म सफाई के ठेके पर रेलवे द्वारा करोड़ों रूपए खर्च किया जा रहा है।
शोपीस बनीं मशीनें
रेलवे सूत्रों का कहना है कि लाखों रूपए कीमत की मशीनें मण्डल के अधिकारियों की लापरवाही से कबाड़ बन रही हैं। लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि स्थानिय प्रशासन द्वारा अनेकों बार मण्डल के अधिकारियों को मशीनों का सुधार कार्य करवाने के विषय में अवगत करवाया पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

समय अवधि में भी सुधार नहीं करवाया गया
रेलवे सूत्रों का कहना है कि इनवेन्ता क्लीनटेक प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी नोयडा दिल्ली से मंगवाई गई थीं। मशीनों पर तीन वर्ष की गरंटी दी गई थी। लेकिन मशीनें मात्र छह में ही खराब हो गई। यदि मशीनों को गारंटी पीरियड़ में कम्पनी भेजी जातीं तो वह बिना खर्च के उनमें सुधार कार्य किया जाता या फिर उन्हें बदल दिया जाता । लेकिन मण्डल के अधिकारियों द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

''हां कुछ मशीनों को रखा हुआ तो देखा है। वह खराब पड़ी हुई तो मामले की जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
रविप्रकाश, जनसम्पर्क
अधिकारी झांसी मण्डल रेलवे

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