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लखवी की रिहाई को पाक सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

लखवी की रिहाई को पाक सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

लाहौर | पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशन कमांडर और 2008 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान लखवी की हिरासत रद्द करने के लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) के फैसले को आज सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि उसकी रिहाई ने सरकार के लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं।
पंजाब सरकार ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से कहा कि मुंबई हमला मामले में आरोपी लखवी के खिलाफ संवेदनशील दस्तावेजों को देखने के बावजूद एलएचसी ने मेंटिनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डिनैंस (एमपीओ) के तहत उसकी हिरासत रद्द कर दी। सरकार ने कहा कि लखवी (55) की रिहाई ने उसके लिए समस्याएं पैदा कर दीं।
सरकार ने याचिका में दलील देते हुए कहा, इसके अलावा लखवी की रिहाई से मुंबई हमला मामले में जांच पर भी असर पड़ सकता है। उसने शीर्ष अदालत से एलएचसी के फैसले को रद्द करने और सुरक्षा कानून के तहत लखवी को फिर से हिरासत में लेने का आग्रह किया। एससी कार्यालय सुनवाई की तारीख तय करेगा।
अदालत में सरकार की ओर से लखवी के खिलाफ संवेदनशील दस्तावेजों को पेश करने में विफल रहने के कारण लाहौर हाई कोर्ट के न्यायाधीश मुहम्मद अनवारूल हक ने नौ अप्रैल को लखवी की हिरासत रद्द कर दी थी। सरकारी वकील ने लखवी की गतिविधियों पर खुफिया एजेंसियों की ओर से तैयार संवेदनशील रिपोर्टों को पेश किया, लेकिन न्यायाधीश ने इस पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा, याचिकाकर्ता की हिरासत के लिए सरकार ने जो कारण बताए हैं वे काफी नहीं हैं।
मुंबई हमला मामले में लखवी की गिरफ्तारी के करीब छह साल बाद 10 अप्रैल को रावलपिंडी के अडियाला जेल से उसे रिहा किया गया। निचली अदालत से 14 दिसंबर, 2014 को जमानत मिलने के बाद भी सरकार सुरक्षा कानून के तहत करीब चार महीने तक लखवी को जेल में बंद रखने में सफल रही थी।
लखवी की रिहाई पर पाकिस्तान को भारत की कड़ी आलोचना क्षेलनी पड़ी। भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए। लखवी और छह अन्य पर 2008 मुंबई हमला मामले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप है। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 300 से अधिक लोग जख्मी हुए थे।

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