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करोड़ों का व्यय फिर भी नहीं मिट रहा कुपोषण

जानवर खा रहे बच्चों का पोषण आहार

शिवपुरी । मध्यप्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के प्रदेश के मुखिया लिए जी जान से लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने गली-गली और गांव-गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र खोले हैं, जिन पर प्रतिमाह हजारों क्विंटल पोषण आहार का वितरण किया जाता है। जिस पर शासन द्वारा प्रतिमाह करोड़ों रुपया व्यय किया जा रहा है, जिसमें गरीब वर्ग के बच्चों को पोषण आहार मिल सके और प्रदेश भर में कुपोषण से होने वाली बच्चों की मौतों पर अंकुश लग सके। लेकिन यह पोषण आहार जिला मुख्यालय पर ही सरेआम काला बाजारी कर विक्रय कर दिया जाता है। शहर के पशुपालक इसे औने-पौने दामों में खरीद कर जानवरों को खिला रहे हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है और गरीब वर्ग के बच्चे आज भी कुपोषित बने हुए हैं।
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दर्ज है बच्चों की अधिक संख्या
जिलेभर में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र संचालकों ने गरीब वर्ग के बच्चों की संख्या अधिक दर्ज कर रखी हैं, जिसके अनुपात से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण आहार आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वितरित किया जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण कर वास्तविकता जानने की जहमत नहीं उठाई जाती है, जिससे शेष बचे पोषण आहार को काला बाजारी कर पशुपालकों को विक्रय किया जा रहा है।
पौष्टिक हलवा बन रहा जानवरों का भोजन
जिला मुख्यालय पर संचालित सैकड़ों आंगनबाड़ी केन्द्रों पर क्विंटलों में आने वाला गरीब बच्चों में पौष्टिक हलवा के लिए वितरण किए जाने वाले पोषण आहार के पैकेटों की बोरी की बोरी पशुपालकों के यहां गाडिय़ों के माध्यम से उतरवाई जा रही हैं। गरीब वर्ग के बच्चों को वितरित किया जाने वाला पोषण आजकल जानवरों का भोजन बन रहा है।

शिकायत के बाद भी नहीं होती कार्यवाही
जिलेभर में संचालित सैकड़ों आंगनबाड़ी केन्द्रों पर होने वाले घालमेल का खुलासा समय-समय पर समाचार पत्रों और जागरुक नागरिकों द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के विरुद्ध सार्थक कार्रवाई नहीं करते जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हौंसले बुलंद हैं।
कैसे होगा कुपोषण मुक्त प्रदेश
समय-समय पर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण से होने वाली मौतों के मामले में शिवपुरी जिला अव्वल रहा है। पोषण आहार की कमी के चलते जिले में गरीब वर्ग के बच्चों की होने वाली मौतों पर अधिकारियों द्वारा पर्दा डालने का ही काम किया जाता है, लेकिन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने का आज तक प्रयास नहीं किए गए, जिससे गरीब वर्ग के बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध होता रहे। ऐसी विषम परिस्थिति में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा कैसे पूर्ण होगी?

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