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अपराध पीडि़ता का निजी अस्पताल में होगा मुफ्त इलाज

भोपाल। अपराध पीडि़त महिला का प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त इलाज होगा। यदि डॉक्टर या प्राइवेट डॉक्टर इलाज से इंकार करते हैं तो उन्हें एक वर्ष तक की सजा हो सकती है। केन्द्र सरकार की फटकार के बाद राज्य सरकार इस संबंध में नीति बनाने जा रही है।
इसके चलते बलात्कार की घटना, एसिड अटैक सहित अन्य प्रकार के शारीरिक अपराध से पीडि़त महिला प्रदेश के किसी भी अस्पताल में इलाज मुफ्त करा सकेगी। राज्य सरकार ने अपराध पीडि़तों को मुआवजा देने का भी प्रस्ताव तैयार किया है। इसे जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा।
निर्भया केस के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी गठित की थी। कमेटी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए दो महत्वपूर्ण सिफारिश की थीं। जिनमें पीडि़त महिलाओं को सरकारी-निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज दिया जाए।
पीडि़त महिला की पुलिस शिकायत दर्ज न करने पर संबंधित को दो वर्ष की सजा दी जाए। कमेटी की अनुशंसा पर केन्द्र ने आईपीसी की धारा 166-बी इलाज से इंकार करने पर एक साल की सजा और आईपीसी की धारा 166-ए महिला की रिपोर्ट दर्ज न करने पर 2 साल तक की सजा का प्रावधान किया है।

जल्द तैयार होगी नीतिक
गृह सचिव डीपी गुप्ता ने कहा, केन्द्र को सुप्रीम कोर्ट में 10 अप्रैल को अपराध पीडि़त मुआवजा और पीडि़त महिलाओं को मुफ्त इलाज को लेकर जवाब पेश होना है। इस संबंध में मुख्य सचिव को पूरा प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। 5 अप्रैल से पहले दोनों योजनाओं की नीति तैयार हो जाएगी।
ेन्द्र की फटकार के बाद जागी सरकार
दिल्ली में हुई बैठक में केन्द्रीय गृह सचिव एलसी गोयल ने मप्र में पीडि़त महिलाओं को राहत देने के संबंध में कानून को लागू न किए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने हिदायत दी कि अपराध पीडि़त लोगों को मुआवजा देने की नीति तैयार करे। गृह सचिव ने यह भी साफ किया है कि 10 अप्रैल को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेशी से पहले राज्य सरकार पीडि़त को राहत देने संबंधी योजना बना ले।
अपराध पीडि़तों या परिजनों को मुआवजा
हत्या होने पर 5 लाख, अज्ञात वाहन से दुर्घटना में मौत पर कमाने वाले को 5 लाख और न कमाने वाले को 3 लाख, बलात्कार पीडि़ता को 3 लाख, एसिड पीडि़ता को 3 लाख, दहेज या अन्य कारण से आग से जलने वाली पीडि़ता को 2 लाख, अज्ञात वाहन से दुर्घटना में 80 फीसदी घायल होने पर कमाने वाले को 3 लाख और न कमाने वाले को 1.5 लाख देना प्रस्तावित है।
50 करोड़ का फंड
अपराध पीडि़तों को मुआवजा देने राज्य सरकार शुरुआत में 50 करोड़ रुपए से पीडी खाता खोलेगी। इससे पीडि़तों को राहत राशि दी जाएगी। जरूरत पडऩे पर फंड में इजाफा किया जाएगा।
जिला स्तर पर कलेक्टर देंगे मुआवजा
विधि विभाग के प्रस्ताव के अनुसार अपराध पीडि़तों को मुआवजा देने के लिए जिलों में सिविल जज की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति गठित की जाएगी। उक्त पीडि़तों को कलेक्टर के माध्यम से मुआवजा दिया जाएगा।

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