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केवल मुआवजे से नहीं बनेगी बात

124 गांव में ओलों से चौपट हुई फसल

ग्वालियर। मार्च में हुई बैमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। पूर्व में जो अनुमान लगाया जा रहा था नुकसान उससे कहीं ज्यादा हुआ है। ऐसे में किसान सरकार से ऋण माफी व बिजली के बिलों की वसूली की अपेक्षा रख रहा है। वहीं इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस दिशा में एक-दो दिन में घोषणा कर सकती है।
सोमवार को जहां भितरवार तहसील में 42 गांवों की फसलें चौपट होने की जानकारी मिली थी वहीं मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार 48 गांवों में फसलें चौपट हुई हैं। इसी क्रम में चीनौर में गांवों की संख्या 16 से बढ़कर 20 और डबरा में गांवों की संख्या 22 से बढ़कर 56 हो गई है। हालांकि सर्वे का काम अभी प्रारंभिक दौर में है इसलिए ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रभावित गांवों की संख्या में और बढ़ोत्तरी हो सकती है।

मुआवजे की राशि नहीं होगी पर्याप्त
जिस तरह से किसानों की फसलें चौपट हुई हंै उसे देखते हुए सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे जैसा साबित होगा। इसलिए सरकार को जनप्रतिनिधियों द्वारा ऐसे सुझाव दिए जा रहे है कि किसानों से ऋण की वसूली पर रोक लगा दी जाए अथवा ऋण माफ कर दिया जाए। साथ ही बिजली के बिल भी माफ कर दिए जाएं। ताकि किसान को जीवन यापन करने में कष्ट न हो। इसके साथ ही यदि किसी किसान के घर में बिटिया की शादी हो तो उसे पिछली वर्ष की तरह इस वर्ष भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। 

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