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अन्ना ने कहा अध्यादेश वापस नहीं लिया गया तो देश भर में पैदल यात्रा कर जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा

अन्ना ने कहा अध्यादेश वापस नहीं लिया गया तो देश भर में पैदल यात्रा कर जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा

नई दिल्ली


भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर अन्ना हजारे ने मोदी सरकार की तुलना अंग्रेजों से की है। अन्ना ने कहा, 'जितना अन्याय सरकार कर रही है उतना तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया ।' जंतर-मंतर पर दो दिवसीय आंदोलन के पहले दिन अन्ना हजारे ने कहा कि इस बार वह अनशन नहीं करेंगे, बल्कि 'जेल भरो आंदोलन' चलाएंगे। उन्होंने मोदी सरकार को चार महीने का समय दिया और कहा कि यह अध्यादेश वापस नहीं लिया गया तो देश भर में पैदल यात्रा कर जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

अन्ना हजारे अपने सैकड़ों समर्थकों और नर्मदा बचाओ आंदोलन की ऐक्टिविस्ट मेधा पाटकर के साथ सोमवार को जंतर-मंतर पर पहुंचे। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी उनसे मिलने पहुंच सकते हैं। 'आप' के सूत्रों ने कहा है कि 'केजरीवाल अन्ना से मिलने जा सकते हैं।' अन्ना ने भी कहा है कि वह केजरीवाल से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि फैसले का विरोध है।

77 वर्षीय अन्ना ने जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों से कहा कि अहिंसा में बहुत ताकत होती है और अपने समर्थकों को भी हिंसा से बचने को कहा। अन्ना ने कहा कि चुनाव से पहले मोदी ने अच्छे दिनों का वादा किया था, लेकिन सिर्फ उद्योगपतियों के अच्छे दिन आए हैं।

अन्ना ने कहा कि भूमि अधिग्रहण पर अध्यादेश लाने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि मूल बिल में संशोधन की जरूरत नहीं थी और अध्यादेश वापस लेने की मांग की। अन्ना ने आशंका जताई कि जमीन के अधिग्रहण में सरकार की मनमानी चलेगी। उन्होंने कहा कि इससे सरकार किसानों की उपजाऊ जमीन ले लेगी।

हजारे ने इसके साथ ही यह भी कहा कि वह आंदोलन के स्टेज पर 'आप' या कांग्रेस के नेताओं को नहीं आने देंगे। उन्होंने कहा, 'दोनों पार्टियों के नेता आम आदमी के तौर पर आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं।' अन्ना ने कहा, 'भारत एक कृषि प्रधान देश है और आप किसानों की मर्जी के बिना उनकी जमीन कैसे ले सकते हैं? सरकार को किसानों के बारे में सोचना चाहिए।'

अन्ना का कहना था कि गांवों में किसानों को अभी इस अध्यादेश के बारे में जानकारी नहीं है। वह हर राज्य के जिले में जाकर किसानों को इसके बारे में बताएंगे और रामलीला मैदान में आएंगे। अन्ना ने इसे आजादी की दूसरी लड़ाई बताया। 

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