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कैलाश मानसरोवर जाना अब होगा आसान

बीजिंग। भारत की ओर से लंबे समय से सिक्किम के रास्ते तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अतिरिक्त मार्ग खोलने की मांग को पूरा करने पर चीन ने सहमति दे दी है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच वार्ता में दोनों पक्षों के बीच मानसरोवर यात्रा के लिए अतिरिक्त मार्ग खोलने के तौर तरीकों पर प्रपत्रों का आदान-प्रदान हुआ।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैय्यद अकबरूद्दीन के अनुसार, भारतीय श्रद्धालुओं के मानसरोवर यात्रा के लिए अतिरिक्त मार्ग जून में खुलेगा। यह रास्ता सिक्किम के नाथू ला दर्रे के पास होगा जहां से भारतीय यात्री बस से यात्रा कर सकेंगे।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मानसरोवर यात्रा के लिए नया मार्ग खोलने का वादा गत पिछले सितंबर में नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किया था। नए रास्ते से श्रद्धालुओं के सुचारू रूप से आवागमन पर दोनों पक्ष सहमत हो गए हैं। भारत और चीन ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम के रास्ते तिब्बत में जून तक दूसरा मार्ग खोलने की खातिर तौर- तरीकों संबन्धी दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया। माना जा रहा है कि इससे अधिक संख्या में भारतीय नागरिक तीर्थयात्रा पर जा सकेंगे। नाथू ला र्दे के रास्ते इस मार्ग से भारतीय तीर्थयात्री बसों से सुविधापूर्वक यात्रा कर सकेंगे।

भारत और चीन ने सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर गतिरोध कम करने संबंधी समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया है। इन समझौतों को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी चीन यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिया जाएगा।

चीन में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि नरेंद्र मोदी चीन का दौरा 26 मई से पहले तब करेंगे जब उनकी सरकार एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी।

समझौतों की शुरुआत के तौर पर फिलहाल दोनों देश तिब्बत स्थित मानसरोवर जाने के एक अतिरिक्त रास्ते के लिए तैयार हो गए हैं।

मानसरोवर के लिए वैकल्पिक रास्ता-

सिक्किम में नाथूला दर्रे से होकर मानसरोवर तक जाने वाला रास्ता इस साल जून से शुरू हो जाएगा। ये भारत का प्रस्ताव था जिसे चीन ने स्वीकार कर लिया है।

चीन में भारत के राजदूत अशोक कंठ ने बताया कि यात्रा के पहले दौर में पचास तीर्थयात्रियों के पांच समूह होंगे। नाथूला से शुरू होकर मानसरोवर तक पहुंचने और फिर वापसी में कुल 12 दिन लगेंगे। मौजूदा समय में हर साल कुल 900 यात्री मानसरोवर की यात्रा करते हैं और ये संख्या इसके अतिरिक्त होगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूददीन ने टवीट किया, भारत और चीन ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए 2015 में अतिरिक्त मार्ग की खातिर तौर-तरीकों पर दस्तावेजों का आदान प्रदान किया।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ वार्ता करने के बाद दोनों पक्षों के अधिकारियों ने दस्तावेजों का आदान प्रदान किया।

चीन की यात्रा पर आई। सुषमा ने इसके पहले आज दिन में कहा कि नए रास्ते का खुलना बड़ी बात होगी।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले साल सितंबर में अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नए रास्ते खोलने के संबंध में वादा किया था।

दोनों पक्षों ने नए रास्ते से यात्रा सुचारू रूप से शुरू करने के लिए मिल कर काम करने पर सहमति जताई थी।

उत्तराखंड में 2013 में आई बाढ़ के कारण एक मात्र मौजूदा मार्ग व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।

विदेश मंत्रालय हर साल 18 जत्थों में करीब एक हजार लोगों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा कराता है। यह यात्रा 22 दिनों की होती है।

अधिकारियों को उम्मीद है कि नए रास्ते के खुलने से तीर्थयात्रियों की संख्या में खासी वद्धि हो सकती है।

चीन ने भारतीय राजदूत अशोक के कांत को अक्टूबर में तिब्बत आमंत्रित किया था ताकि यात्रियों के लिए तैयारियां की जा सकें।



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