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रोते रहे बच्च्े, नहीं मिला उपचार

कुछ देर रुक कर चले गए चिकित्सक


ग्वालियर | आए दिन चिकित्सकों की मनमानी के मामले सामने आते रहते हैं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सोमवार को ऐसा ही एक मामला उस समय सामने आया जबकि जिलाधीश के निर्देशों के अनुसार हजीरा स्थित सिविल अस्पताल में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आयोजित शिविर में चिकित्सक नहीं पहुंचे। इसके चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ यहां पहुंचे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार इस शिविर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सुपरवाईजर द्वारा रंगयाना मैहोल्ला, काशी नरेश की गली, गोल पाड़ा, मेदाई मैहौल्ला आदि क्षेत्रों से लगभग 20 से 25 बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सुबह लगभग 10 बजे अस्पताल लाया गया था। लेकिन यहां पदस्थ चिकित्सक डॉ. ए.के. सिघल की मनमानी के चलते बच्चों को सर्दी में बाहर बैठना पड़ा। जब दोपहर लगभग 11.30 बजे तक चिकित्सक नहीं आए तो बच्चे रोने लगे। हद तो उस समय हो गई जबकि इस संवाददाता ने इस संबध में सिविल अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ऐके सिंहल से शिविर में उपस्थित नहीं होने की जानकारी मांगी तो उनका जवाब था कि आप कौन होते हैं,मुझसे पूछने वाले मैं आपके बेतुके सवालों का जबाव नहीं दे सकता।

मेरे भतीजे को बहुत तेज बुखार है
इसी शिविर में सोमवार को अपने भतीजे का उपचार कराने पहुंची चार शहर का नाका निवासी नीलम ने रोते हुए बताया कि वह अपनी बहन के बच्चे के उपचार के लिए अस्पताल में लगभग 11.30 बजे पहुंची थी। जहां उपस्थित डॉ. सिंघल ने बच्चे का ठीक से परीक्षण नहीं किया। यह कहने पर कि बच्चे का बुखार नहीं जा रहा तो डॉ. साहब ने उसे डांट दिया।

''बच्चों के स्वास्थ्या परीक्षण के लिए डॉ. ए.के. सिंघल की ड्यूटी थी, लेकिन डॉ. सिंघल क्यों ओपीडी से चले गए, मुझे जानकारी नहीं है। मैने तो सम्बन्धित अधिकारियों को शिविर में चिकित्सको के ना होने की सूचना दे दी है।''
डॉ. प्रशांत नायक, चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल
''डॉ. ए.के. सिंघल के खिलाफ पहले भी शिकायतें आ चुकीं हैं, शिविर में चिकित्सक क्यों उपस्थित नहीं थे। इसकी सूचना मैंने सिविल सर्जन से मांगी है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।''
डॉ. संजय गोयल
जिलाधीश ग्वालियर

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