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तानसेन समारोह में देंगे एकल सारंगी वादन की प्रस्तुति

ग्वालियर। खुदा की इबादत के लिए सबसे अच्छा माध्यम संगीत को बताने वाले ग्वालियर घराने के अब्दुल मजीद खां को संगीत की तालीम विरासत में मिली है। होश संभालते ही सारंगी की धुनों से प्रेम हो गया। अब्दुल मजीद खां 40 बसंत पार कर चुके हैं। लेकिन सारंगी को हाथों में लेते ही अंगुलियों की थिरकन बढ़ जाती है। सारंगी वादक अब्दुल मजीद खां की सात पीढिय़ां संगीत की साधक रही हैं। साधारण परिवेश में जन्म लेने और ग्वालियर आकाशवाणी में ए ग्रेड के स्टाफ कलाकार हैं।
स्वदेश से चर्चा में श्री खान ने बताया कि सारंगी वादन उनके लिए प्रभु की भक्ति के समान है। इसके माध्यम से संगीत साधना उन्हें विरासत में मिली है। अब्दुल मजीद खां स्थानीय कलाकार के रूप में तानसेन समारोह में सारंगी वादन की प्रस्तुति देंगे। उनके साथ तबले पर संगत अब्दुल हनीफ खां करेंगे। उन्होंने बताया कि समारोह में प्रथम प्रस्तुति 2004 में संगत के रूप में दी थी। जिसके बाद 2006 सोलो सारंगी वादन की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि अब नौ साल बाद फिर से सोलो सारंगी वादन की प्रस्तुति देने का मौका मिल रहा है। इसे लेकर काफी खुशी महसूस हो रही है। युवा वर्ग को शास्त्रीय संगीत में रूचि लेना चाहिए, क्योंकि यही संगीत की आत्मा होती है। साथ ही शास्त्रीय संगीत में सहायक वाद्ययंत्र सारंगी आदि में भी ज्ञान अर्जित करना चाहिए।

बचपन से रुचि थी
डबरा में जन्में श्री खान ने बताया कि उन्हें बचपन से ही शास्त्रीय संगीत में रुचि थी। जब मैं आठ वर्ष का था, तब मेरे पिता घर में ही रियाज करते थे। शुरू से ही संगीत का माहौल मिलने के कारण इस क्षेत्र में जाने का निश्चय किया। शुरुआत में मेरे पिता यानी मेरे गुरु स्व. उस्ताद वशीर खां साहब, इसके बाद पद्मश्री उस्ताद अब्दुल लतीफ खां साहब से सारंगी की शिक्षा प्राप्त की।

ख्यातिनाम कलाकारों के साथ दे चुके हैं प्रस्तुति
अब्दुल मजीद ने देश के कई प्रसिद्ध ख्याति प्राप्त कलाकारों के साथ सारंगी की सुरीली संगत की है तथा राष्ट्रीय कार्यक्रम रविवासरीय अखिल भारतीय संगीत सभा में सारंगी की प्रस्तुति दी है। जिसमें छन्नूलाल मिश्रा बनारस, कुमार गंधर्व के पुत्र मुकुल शिवपुत्र। इसके अलावा शास्त्रीय गायक डॉ. पॅ. चितरंजन ज्योतिषी, उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां, मालिनी राजुरकर, पं. बाला साहेब पूंछ वाले, पाकिस्तान की गायिका फरीदा खानम एवं जम्मू कश्मीर में सारंगी वादन एकल की प्रस्तुति दे चुके हैं।

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