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अनुसंधान में लापरवाही बरती तो फिर छूट जाएंगे सोल्वर

2013 में 19 में से केवल एक आरोपी को मिली थी सजा

ग्वालियर। व्यापमं फर्जीवाड़े की जांच कर रही सीबीआई को अनुसंधान में कई बातों का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व में भी 2009 में फर्जी तरीके से परीक्षा देने का आरोप में 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सजा केवल एक को हुई थी। इस पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष की जमकर किरकिरी हुई थी क्योंकि जिनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी, गवाही के दौरान वे ही अपने बयान से पलट गए थे। जानकारी के अनुसार पांच जुलाई 2009 को ग्वालियर में पीएमटी हुई थी। इसमें कुल 19 लोगों को फर्जी तरीके से परीक्षा में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और कम्पू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लगभग साढ़े चार साल बाद 11 दिसम्बर 2013 को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए केवल अब्दुल तब्बाब को दोषी ठहराया और चार साल के कारावास व 26,000 के अर्थदण्ड की सजा सुनाई, जबकि शेष 18 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया। हालांकि निचली अदालत के फैसले के विरुद्ध जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय में अपील की है, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी अपील का निराकरण नहीं हो सका है।

अब्दुल को मिल गई है जमानत
अब्दुल तब्बाब ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए आपराधिक अपील दायर की है, जिस पर सुनवाई करते हुए आठ मई 2014 को न्यायालय ने उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।

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