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लापरवाही की हद पार, अब 'लव' बीमार

'कुश' का हुआ अंतिम संस्कार ठ्ठ प्रबंधन ने कहा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा मौत के कारणों का खुलासा

अरविन्द माथुर/ग्वालियर। अपने चौथे जन्मदिन से मात्र तीन दिन पहले दम तोडऩे वाले चिडिय़ाघर के बाघ कुश का गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। बताया जाता है कि अब उसके ही साथ जन्में लिए दूसरे बाघ लव ने भी खाना-पीना छोड़ दिया है। हालांकि चिडिय़ाघर प्रबंधन की मानें तो कुश की मौत बीमारी के कारण हुई है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि उसकी मौत का सबसे बड़ा कारण लापरवाही रहा है। बताया जाता है कि लगातार चार-पांच दिन तक खाना-पीना छोडऩे के बावजूद उसका उपचार प्रारंभ नहीं किया गया था। यहां तक कि उसकी जांच भी किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से नहीं कराई गई। यूं तो वन्य प्राणी उद्यान के चिकित्सक और वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कुश का ब्लड सैंम्पल जांच के लिए जबलपुर स्थित लैब में भेजा गया था लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि कुश की मौत भी हो गई और जांच रिपोर्ट उसके अंतिम संस्कार तक नहीं आ सकी है। वहीं प्रबधंन का यह भी कहना है कि उसका उपचार निदेशक सेन्टर फोर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एवं फोरेसिंक पशु चिकित्सा महाविद्यालय डॉ. ए. व्ही. श्रीवास्तव के निर्देशन में प्राणी उद्यान के चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था। वहीं डॉ.श्रीवास्तव उसकी स्थिति की ऑनलाइन निगरानी कर रहे थे। यदि वास्तव में यह सही है तो शायद ऐसी स्थिति नहीं बनना थी कि बात बाघ की मौत तक पहुंच जाती। फिलहाल प्रबंधन का यही कहना है कि वास्तविकता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। लेकिन यहां भी प्रश्न यही है कि इससे पहले जितने जानवर ऐसे मरे उनमें से कितनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा हुआ और सच सामने आया। जहां तक वरिष्ठ अधिकारियों और एमआईसी सदस्यों को इसकी जानकारी देने का मामला है तो प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने 28 सितम्बर को ही इसकी सूचना दे दी थी।

कुश के हत्यारों का पता लगाएं

शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने कुश के हत्यारों का पता लगाकर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष दर्शन सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया है कि ग्वालियर चिडिय़ा घर की रौनक रहे कुश की मृत्यु संभवत: चिडिय़ाघर के चिकित्सकों की लापरवाही से हुई है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि 4-5 दिन से बीमार होने के बावजूद भी कुश का इलाज योग्य चिकित्सकों से कराना उचित नही समझा गया । जबकि इस स्थिति में शिवपुरी के नेशनल पार्क के चिकित्सकों केा बुलाया जा सकता था।

पहले भी लापरवाही से मरे हैं पशु-पक्षी

लगभग छह वर्ष पूर्व चिडिय़ाघर में कुछ चीतलों की बीमारी से मौत हुई थी। मामले के तूल पकडऩे पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाने के साथ ही,यहां वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को निगरानी के लिए प्रभारी बनाकर नियुक्त किया गया था। लेकिन इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और जानवर लगातार मौत के मुंह में जाते रहे। वहीं इसके बाद घडिय़ालों की मौत भी हो गई थी। लेकिन हर बार प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाकर पल्ला छुड़ाते हुए यही कहा कि मौत बीमारी से हुई है। भले ही यह आज तक खुलासा नहीं हो सका है कि उन्हें बीमारी क्या थी। हालांकि ऐसे मामलों को लेकर केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण (सीजेडए) भी नाराजगी जता चुका है और इसी के चलते कई बार नए जानवरों को यहां लाने में प्रबंधन को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
काले हिरणों की भी हुई थी मौत
इससे पहले यहां काले हिरणों की मौत भी प्रबंधन की लापरवाही के कारण ही हुई थी जबकि उनके कैज में रात के समय कुत्ते घुस आए थे और उनकी दहशत तथा कुत्तों के साथ संघर्ष में उनकी मौत होने की बात सामने आई थी। इसे लेकर लम्बे समय तक विवाद चला और परिषद में भी यह मामला गूूंजा।

इनका कहना है
कुश के मामले में लापरवाही बरती गई है। मुझे उसकी मौत से मात्र तीन घंटे पहले ही जानकारी दी गई। जबकि उसने पिछले चार दिन से खाना-पीना छोड़ दिया था। जहां तक लव के खाना पीना छोडऩे की बात है तो यह स्वाभाविक है कि यदि एक जानवर की मौत होती है तो उसके शोक में दूसरे जानवरों का व्यवहार इस तरह का हो जाता है। लेकिन उसके स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। मैं स्वयं कल जाकर पूरी जानकारी लूंगा।

सतीश बोहरे, जनकार्य प्रभारी
28 सितम्बर को ही निगमायुक्त व प्रभारी जनकार्य आदि को प्रबंधन द्वारा कुश की बीमारी की जानकारी दे दी गयी थी। इसके बाद भी उसके उचित उपचार की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। मुझे भी जानकारी मिली है कि बाघ लव ने भी खाना-पीना छोड़ दिया है तो यह शायद कुश की मौत के कारण हो सकता है।
देवेन्द्र तोमर, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम

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