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लापरवाही: धूल खा रहीं लाखों की मशीनें

विजय ऋषि / ग्वालियर। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के माईक्रोबायोलॉजी विभाग में लाखों रुपए खर्च कर खरीदी गईं मशीनें जगह की कमी के कारण रखी-रखी धूल खा रही हैं। डेढ़ वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी मशीनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उल्लेखनीय है कि माईक्रोबायोलॉजी विभाग ने महाविद्यालय प्रबन्धन को मरीजों की जांच एवं जूनियर चिकित्सकों की रिसर्च व पढ़ाई की आवश्यकता के नाम पर जून 2013 में मुम्बई की ईस्को बायोटेक कम्पनी से लाखों रुपए की मशीनें खरीदीं थीं। इसके साथ ही विभाग में भारत सरकार के आरएनटीसीपी द्वारा भी लाखों रुपए की मशीनें खरीदी गई थीं। विभाग के लापरवाह रवैये के कारण डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी मशीनों को चालू नहीं किया जा सका है। यहां तक की मशीनों को रखने के लिए कोई उपयुक्त स्थान भी नहीं देखा गया। इसके चलते जहां मशीनों का उपयोग न होने के कारण उनकी वारण्टी की अवधि समाप्त होने वाली है वहीं दूसरी ओर मशीनों का उपयोग न करने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बना हुआ है।
माईक्रोबायोलॉजी विभाग ने जरुरत बताकर लाखों की मशीनों की खरीद तो कर ली लेकिन खरीदी के पूर्व मशीनों को लगाने के लिए स्थान निश्चित नहीं किया गया। जिससे मशीनें अब धूल खा रही हैं। सामान्यत: इनसे मरीजों के रक्त, मल, मूत्र आदि जैसी जांचें की जाती हैं लेकिन सुविधा ही न होने के कारण मरीजों को बाहर जाना पड़ता है जो मरीजों की जेब पर डांका डालने का काम कर रही है। हालांकि अब जबकि मशीन चालू न होने का मामला सामने आया तो विभाग प्रमुख ने मशीनों को स्टॉल करने के लिए स्थान सुनिश्चित होने की बात कही है।

जूनियर चिकित्सकों की रिसर्च पढ़ाई में व्यवधान
माईक्रोबायोलॉजी विभाग में धूल खा रही लाखों की मशीनों को चालू नहीं किए जाने से जूनियर चिकित्सक ना ही ठीक से रिसर्च कर पा रहे हैं और न ही कुछ नया सीख पा रहे हं। इस कारण इन्हें उपयोगी जानकारी से वंचित होना पड़ रहा है।

ये हैमशीनें
* बायोलॉजी सेफ्टी कैबिनेट
* सीओटू इनकूबेटर
* लेमिनर एयर फ्लोव केबिनेट
* इनकी कीमत 2, 3 एवं 4.5 लाख रुपए है।
* इसके अलावा भारत सरकार द्वारा भी मशीनें मंगाईं गई थीं।

इनका कहना है

मशीनों को बाहर रखने का कारण उनको स्टॉल करने के लिए उचित स्थान नहीं होना था। लेकिन अब वर्कशॉप के पास ही लैब के लिए स्थान देख लिया गया है। जहां मशीनों को स्थापित कर स्टॉल किया जाएगा।
डॉ.शशि गांधी
विभागाध्यक्ष, माईक्रोबायोलॉजी विभाग,
गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय

माईक्रोबायोलॉजी विभाग में मशीनों की खरीद तो की गई थी लेकिन कब खरीदी गई इसकी जानकारी नहीं है। विभागाध्यक्ष से पूछा जाएगा कि डेढ़ वर्ष बाद भी मशीनें क्यो नहीं लगाई गर्इं।
डॉ.जी.एस.पटेल
अधिष्ठाता, गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय

गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय अधिष्ठाता से मामले की जानकारी ली जाएगी कि डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी मशीनों को चालू क्यों नहीं किया गया।
के.के.खरे
संभागायुक्त, ग्वालियर

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