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तहसील की मांग ने फिर पकड़ा जोर

दबोह। एक लम्बे समय से दबोह में तहसील की मांग की जा रही है। जिसे आज तक पूरा नहीं किया गया है। लेकिन दबोह के निवासियों ने एक बार फिर एकजुटता दिखाते हुए दबोह में तहसील की मांग ने फिर जोर पकड़ लिया है जिसमें दबोह के राजनीतिक दलों के साथ-साथ व्यापारी, बकीलों तथा एलआईसी एजेंटों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। दबोह को तहसील का दर्जा दिलाने के लिये पूर्व में कई धरना प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं। यहां तक कि म.प्र. के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने दबोह तथा लहार की एक बहती आमसभा में दबोह को तहसील का दर्जा दिलाने के बाद कही थी। मगर दबोह को तहसील का दर्जा आज तक नहीं दिया गया। जबकि दबोह के साथ-साथ जिन नगरों में तहसीहल की घोषणा की गई थी उन नगरों में तहसील बना दी गई है।
यहां बता दें कि दबोह में तहसील की मांग सन् 1981 कांग्रेस शासन से चली आ रही है तब प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय कांगेस की सरकार थी। उसी समय दबोह के लागों ने पूर्व मंत्री सत्यदेव कटारे के दबोह आगमन पर एक जंगी प्रदर्शन भी किया था, जिसमें करीब करीब 37 लोगों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज किए गए थे तब से लेकर आज तक दबोह को तहसील का दर्जा दिलाने के लिए समय-समय पर प्रदर्शन तथा क्रमिक अंशन भी किए गए इसी के चलते आज मंडी प्रांगण में दबोह के व्यापारियों, अभिभाषकों, एलआईसी एजेंटों व दबोह के आम नागरिकों ने बैठक आयोजित की जिसमें मख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार दबोह को तहसील का दर्जा दिलाने तथा दबोह में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा खोलने की मांग में जोर पकड़ा और एकजुट होकर आगे की रणनीति बनाई जिसमें दो अक्टूबर से सत्याग्रह व पांच को धरना प्रदर्शन, सात को क्रमिक अनशन, नौ व 10 को भूख हड़ताल के साथ-साथ 15 अक्टूबर को आमरण अनशन का निर्णय लिया गया है। इस संदर्भ में दबोहवासियों ने पुलिस स्टेशन जाकर जिलाधीश के नाम दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा जिसमें आगामी माह में होने वाले नगरीय निकाय के चुनाव का बहिष्कार भी शामिल है।
यहां बता दें कि दबोह थाने में करीब 65 गांव आते हैं, जिन्हें तहसील कार्य से लहार जाना पड़ता है तथा दबोह में करीब छह करोड़ रुपए प्रतिमाह का अनुमानित लेन-देन है इसके बावजूद यहां भारतीय स्टेट बैंक की शाखा न होने से किसानों, अधिकारियों व एजेंटों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि एक व्यापारी की जान भी जा चुकी है फिर भी शासन की आंख नहीं खुल रही है। गौरतलब है कि पूर्व में दबोह के अभिभाषकों ने उपतहसील प्रांगण में एक माह तक क्रमिक अनशन भी किया लेकिन सत्तारूढ़ का कोई भी नुमांइदा धरनास्थल पर नहीं पहुंचा और न ही आज तक दबोह को तहसील का दर्जा मिला।

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