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करोड़ों खर्च फिर भी 'टाउनहॉल का बेड़ा गर्क'

करोड़ों खर्च फिर भी टाउनहॉल का बेड़ा गर्क

ऐतिहासिक धरोहर की दुर्दशा

अरविन्द माथुर / ग्वालियर।
ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की बातें तो बहुत होती हैं, करोड़ों की योजनाएं भी बनाई जाती हैं लेकिन अधिकतर ये सरकारी फाइलों में ही सिमटकर रह जाती हैं। यदि काम शुरू भी होता है तो वह अधर में लटक जाता है, परिणामस्वरूप इनकी हालत में सुधार की जगह स्थिति और बदतर हो जाती है। कुछ ऐसी ही हालत इन दिनों शहर के ह्रदयस्थल महाराजबाड़ा स्थित एक शताब्दी से अधिक पुरानी ऐतिहासिक इमारत टाउनहॉल की है।
वर्ष 1907 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया प्रथम ने इसका निर्माण कराया था। रोमन शैली में बनी यह इमारत आज नगर निगम के आधिपत्य में है। यदि रखरखाव की बात करें तो इसके टूटे हुए बुर्ज और लगातार हो रहा कीमती पत्थरों का क्षरण इसकी पोल खोल देते हैं। इसका बाहरी स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा है। हांलाकि नगर निगम के दावों की बात करें तो पिछले पांच वर्ष से इमारत की स्थिति को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इस दौरान लगभग तीन करोड़ रुपया खर्च होने के बावजूद हालत सुधरने की जगह और बिगड़ती जा रही है।
ये है इतिहास
प्रांरभ में नाटकघर के रूप में शुरूआत होने के बाद लगभग 50 वर्ष तक इस इमारत में रीगल सिनेमाघर का संचालन हुआ। इसके बाद लगभग 17 वर्ष पूर्व वर्ष 1997 में नगर निगम उसके पक्ष में हुए सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय के बाद इसे मुक्त कराने और अपने आधिपत्य में लेने में सफल रही। इसमें तत्कालीन निगम उपायुक्त डॉ. हरि और निगम की सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष एवं जिला योजना समिति के सदस्य सुधीर गुप्ता का विशेष योगदान रहा। इसके पश्चात इसमें निगम के कुछ कार्यालय संचालित होते रहे। लेकिन आज यह वीरान है।
करोड़ों खर्च, नतीजा शून्य
लगभग पांच वर्ष पूर्व इस इमारत को सांस्कृतिक रंगमंच का रूप देकर यहां समय- समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की योजना बनाई गई थी। इसके तहत इसे एयरकन्डीशन करने के साथ ही यहां विशाल मंच, ईको साउण्ड सिस्टम लगाने तथा इसकी दीवारों और छत को आकर्षक स्वरूप दिया जाना था। इसके लिए प्रांरभ में एक निजी कम्पनी को 98 लाख का ठेका दिया गया लेकिन निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने से यह लागत बढ़कर एक करोड़ दो लाख तक पहुंच गई। इसके बाद बचे हुए काम को अगले एक वर्ष में पूरा किया जाना था। इसके लिए एक अन्य कम्पनी को एक करोड़ चालीस लाख का ठेका दिया गया था। लेकिन इसके बाद आज भी यह काम अधर में लटका है। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन निगम अधिकारियों के जिम्मे यह काम है उन्हें ना तो इस पर होने वाले खर्च की जानकारी है और ना ही यह पता है कि कितना काम हुआ है और क्या होना शेष है। इस स्थिति को देखकर यही कहा जा सकता है कि नगर निगम इस ऐतिहासिक धरोहर का रखरखाव और सुरक्षा करना तो दूर इसका बेड़ा गर्क करने में लगी है।

करना था कुछ, हो रहा है कुछ
टाउनहॉल के रखरखाव और यहां हो रहे विकास कार्य की बात करें तो इससे इमारत का स्वरूप निखरने की जगह और बिगड़ता जा रहा है। इसके प्रवेश द्वार पर लगी सीडिय़ों पर जहां चूने से पुताई कर पल्ला झाड़ लिया गया है वहीं इमारत में लगी खिड़कियां और दरवाजे एक समान नहीं लगाते हुए अलग-अलग डिजाइनों के लगा दिए गए हैं। वहीं इन दिनों बाहरी हिस्से का जो क्लीनिकल ट्रीटमेंट(रासायनिक उपचार) किया जा रहा है। उसमें
विधिवत प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही। बताया जाता है कि इसके कीमती और आकर्षक पत्थरों को साफ करने के लिए एसिड का उपयोग किया जा रहा है जिससे इसके और अधिक क्षरण की संभावनाएं हैं।

एजीएल ने लगाया करोड़ों का चूना
यदि इस इमारत की दुर्गति की बात करें तो इसके ऊपरी हिस्से में लगातार पांच वर्ष तक निगम की सभी शाखाओं को कम्प्यूटरीकृत करने आई निजी कम्पनी एजीएल का कब्जा रहा। जबकि नियमानुसार इस इमारत में उस कम्पनी को बिना किराया दिए अपना काम करने का कोई अधिकार नहीं था। यहां तक कि उस कम्पनी द्वारा उपयोग किए गए चार एसी का बिजली खर्च भी नगर निगम ने ही उठाया और कम्पनी निगम को दस करोड़ का चूना लगाकर बीच में ही काम छोड़कर रातोंरात गायब हो गई।

भी है खास
टाउनहॉल जब नाटकघर था उस समय यहां मशहूर फिल्म अभिनेता, निर्माता, निर्देशक पृथ्वीराज कपूर ने नाटक का मंचन किया था।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अस्थिकलश जनता के दर्शनों के लिए यहां रखे गए।


ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा और रखरखाव आवश्यक है। टाउनहॉल में चल रहा काम डिले हो रहा है। मुझे भी इसकी जानकारी मिली है और आपने भी इसे मेरे संज्ञान में लाया है। इसकी समयसीमा तय कर शीघ्र ही इस काम को नियमानुसार और उचित तरीके से पूरा कराया जाएगा।
अजय गुप्ता, निगमायुक्त, ग्वालियर

हां टाउनहॉल का काम लटका हुआ है। इसका वास्तविक बजट क्या है, क्या काम होना है और कितना हुआ है। इसकी जानकारी फाइल देखकर ही दे सकूंगा।
अजय पाण्डे, सिटी प्लानर, नगर निगम

विधिवत और नियमानुसार क्लीनिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। अगले दस दिन में यह पूरा हो जाएगा।
शिशिर श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट अधिकारी

टाउनहॉल ऐतिहासिक धरोहर है। जिला योजना समिति के सदस्य के रूप में बाड़ा सौन्दर्यीकरण योजना में मैने इसे शामिल कराया था, लेकिन आज तक उस पर कार्य नहीं हुआ। करोड़ों खर्च हो रहा है फिर भी इमारत की हालत और बिगड़ती जा रही है। इस कार्य को शीघ्र ही पूरा कराना चाहिए।
सुधीर गुप्ता पूर्व नेता प्रतिपक्ष
नगर निगम एवं पूर्व जिला योजना समिति सदस्य


टाउनहॉल में कराए जा रहे विकास कार्यों में देर हुई है। एक ठेकेदार बीच में ही काम छोड़ गया। फिलहाल इसका क्लीनिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। अब आगे कार्य के लिए निगमायुक्त से टेण्डर बुलाकर इसे समय पर पूरा कराने के लिए कहा जाएगा।
सतीश बोहरे पूर्व जनकार्य प्रभारी, महापौर परिषद

हादसों को आमंत्रण
इसके मुख्य हॉल के अन्दर के हिस्से में लगे तीसरे द्वार को जहां पूरी तरह बंद कर इस पर बिजली के मीटर लगा दिए गए हैं, तो अन्य दरवाजों को भी इस तरह बंद कर दिया गया है कि वह आसानी से नहीं खुल सकते। इस स्थिति में यदि कभी आगजनी या अन्य कोई हादसा हुआ तो इसमें से अन्दर बैठे लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा।

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