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अजीज कुरैशी की याचिका पर केंद्र को नोटिस

अजीज कुरैशी की याचिका पर केंद्र को  नोटिस

नई दिल्ली। उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस भेजा है। उच्चत्तम न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है। इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की खंडपीठ ने याचिका पांच सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दी है । अजीज कुरैशी ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे शख्स पर इस्तीफे का दबाव बनाया जाना गलत है ।
संप्रग सरकार के समय में नियुक्त किए गए कई राज्यपालों ने राजग सरकार द्वारा गृह सचिव के जरिए भेजे गए संदेश के बाद पद छोड़ दिया, लेकिन उत्तराखंड के राज्यपाल ने मोदी सरकार से टकराने का फैसला किया है। अपनी याचिका में उन्होंने गृह सचिव द्वारा फोन करके इस्तीफा देने के लिए कहे जाने को 'अवज्ञा और दुस्साहस' करार देते हुए इस पर सवाल उठाया है।
कुरैशी ने याचिका में कहा है, 'संविधान का अनुच्छेद 156(1) कहता है कि राज्यपाल राष्ट्रपति के भरोसे को कायम रखता है तो पांच वर्ष तक अपने पद पर बने रह सकता है । ऐसे में अगर कोई उन्हें पद छोड़ने के लिए कह सकता है तो वह सिर्फ राष्ट्रपति हैं ।' अजीज ने कहा कि उच्चत्तम न्यायालय ने पहले भी कई बार साफ किया है कि राज्यपाल केंद्र सरकार का कर्मचारी नहीं होता है । उन्होंने केंद्रीय अदालत के 2010 के फैसले का भी हवाला दिया । भाजपा सांसद बी पी सिंघल ने 2004 में राजग के द्वारा नियुक्त राज्यपालों विष्णुकांत शास्त्री, बाबू परमानंद, कैलाशपति मिश्रा और केदरानथा साहनी को संप्रग सरकार द्वारा बर्खास्त किए जाने को चुनौती दी थी ।
उच्चत्तम न्यायालय की संविधान पीठ ने इस पर फैसला देते हुए कहा था, 'किसी राज्यपाल को सिर्फ बाध्यकारी कारणों के आधार पर ही बदला जा सकता है और वह भी तब जब कि उनके खिलाफ दुराचरण या भ्रष्टाचार का अपराध सिद्ध हो गया हो।' खंडपीठ ने कहा था, 'राष्ट्रपति को राज्यपाल को हटाने का कारण बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह जरूरी है कि कारण
हो ।


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