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कलेक्टर साहब नहीं बचा पाए पानी, दबंगों ने बांध में कर दी खेती

सैकड़ों लोगों को प्यास बुझाने नहीं मिलता पानी

दीपक सविता / ग्वालियर। ग्वालियर में एक ओर जहां जबरदस्त पानी की किल्लत है। शहरवासियों को एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। शासन शहर की प्यास बुझाने के लिए चम्बल और ककैटो पेहसारी से पानी लाने की योजना बना रह है। वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन पानी को लेकर कितना संवेदनशील है? इसका पता इस बात से चलता है कि नगरीय निकाय में शामिल किए गए गांवों में सिंधिया राजवंश द्वारा करीब एक सदी पूर्व बनाए गए बांध, जो इस वर्ष बारिश में पानी से लबालब थे, उनकी भी रक्षा नहीं कर पाया क्योंकि इन दिनों बांधों से पानी बहाकर वहां पर खेती की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि मुरार नदी पर 1933 में जीवाजीराव सिंधिया ने कई बांधों का निर्माण कराया था, जिनमें से छौंड़ा और खेरिया गांव के बंध इस वर्ष बारिश के मौसम में पानी से लबालब भर गए थे, जिस कारण ग्रामीणों को आस थी कि इस वर्ष उन्हें पीने के लिए पानी मिल जाएगा, साथ ही बांध के पानी का वह अपने पालतु पशुओं और खेती के लिए भी उपयोग कर सकेंगे, लेकिन गांव के दबंगों ने रातों-रात इन बांधों का पानी नहर के जरिए बहा दिया और बांध की सैकड़ों बीघा जमीन को खेती के लिए जोत दिया है। वहीं दूसरी ओर बांधों का पानी बहा दिए जाने से एक ओर जहां ग्रामीणों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर खैरिया और छौड़ा गांव सहित आसपास के गांवों का भू-जल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है।

कलेक्टर ने जलसंसाधन को सौंपा था जिम्मा
स्वदेश ने जब बांधों में पानी बहाए जाने की खबर प्रकाशित की थी, उस समय कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग को बांध में पानी रोके जाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन जल संसाधन विभाग इन बांधों में पानी रोकने में नाकाम रहा।

मुरार नदी पर बने है यह बांध
ग्वालियर में बहने वाली मुरार नदी पर सिंधिया राजवंश ने चार बांध बनाए थे, जो नयागांव, छौड़ा, खेरिया और अलापुरा में आज भी मौजूद हैं, लेकिन इनका उचित रखरखाव नहीं होने से बांधों की हालात जर्जर हो रही है। इन बांधों में रोके गए पानी से मुरार नदी में कभी हमेशा कलकल धारा बहती रहती थी, लेकिन पिछले कई सालों से यह नदी सूखी पड़ी है।

चार बांधों में तिघरा का पच्चीस फीसदी पानी
बारिश के दौरान तिघरा जलाशय में जितना पानी जमा होता है, उसका नयागांव, छौड़ा, खेरिया और अलापुरा के बांधों में जमा पानी का अनुपात निकाला जाए तो इनका पानी तिघरा जलाशय में एकत्रित पानी का पच्चीस फीसदी से अधिक होगा।

कौडिय़ों में बने थे यह बांध
गांव के लम्बरदारों के वंशज भारत सिंह कंषाना निवासी ग्राम छौड़ा ने बताया कि उनके पूर्वजों ने इस बांध के निर्माण के समय यहां मजदूरी की थी। उस समय समय उन्हें कौडिय़ों के रूप में मजदूरी मिलती थी।

''खेरिया बांध का पानी हमने नहीं छोडऩे का आदेश दिया था, लेकिन छौड़ा बांध से भी अगर पानी छोड़ा गया है तो वहां पर मैं दिखवाता हूं। यह बांध निजी जमीन पर बने हुए हैं। खेरिया बांध की जमीन को अधिग्रहण करने के आदेश दिए गए हैं।''
पी. नरहरि, कलेक्टर, ग्वालियर

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