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'तारीखों' में उलझा भोपाल-इंदौर परिसीमन, सुनवाई टली

भोपाल। इंदौर और भोपाल नगर निगम चुनावों का मामला कोर्ट की 'तारीखों' में उलझता नजर आ रहा है। हालांकि भोपाल-इंदौर चुनाव संबंधी फाइल प्रदेश सरकार राज्यपाल रामनरेश यादव को भेज चुकी है।
चूंकि राज्यपाल अस्वस्थ हैं लिहाजा फिलहाल उनके फैसले का बेसब्री से इंतजार सरकार और राजनीतिक दलों को है। उधर इसी बीच भोपाल नगर निगम परिसीमन से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को होने वाली सुनवाई दो दिसंबर तक के लिए मुल्तवी हो गई है।
गौरतलब है कि इंदौर और भोपाल के परिसीमन पर हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सरकार ने इस मामले में राज्यपाल से अनुमति नहीं ली है। इन दोनों नगर निगमों के परिसीमन को लेकर सरकार ने एक बार फिर विधिवेत्ताओं की राय ली है। सूत्रों की माने तो जबलपुर और छिंदवाड़ा के मामले में राज्यपाल द्वारा तत्काल अनुमति देने से सरकार उत्साहित है। उसे उम्मीद है कि राज्यपाल एक दो दिन में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देंगे। राज्यपाल अभी अस्वस्थ हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दो दिसंबर को पेशी
दूसरी ओर भोपाल के परिसीमन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई दो दिसम्बर तक के लिये टल गई है। सुप्रीम कोर्ट में परिसीमन को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें परिसीमन की प्रक्रिया और गांवों को शामिल करने में अपनाये गये मापदंडों को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट को इस याचिका पर सुनवाई पहले 18 नवंबर को करनी थी पर अब यह सुनवाई दो दिसम्बर को होगी।

महापौर पद के आरक्षण पर हाईकोर्ट में बहस
प्रदेश की 16 नगर निगम के मेयर और 68 नगर पालिका अध्यक्षों के आरक्षण की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज हाईकोर्ट में संयुक्त रूप से सुनवाई की जा रही है। छिंदवाड़ा नगर निगम के गठन, मैहर नगरपालिका के परिसीमन व जबलपुर, इंदौर, भोपाल व छिंदवाडा नगर निगम के मेयर पद के आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका पर 14 नवंबर को चीफ जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस वंदना कसरेकर की खण्डपीठ ने सुनवाई की थी।

याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट आदर्शमुनि त्रिवेदी ने दलील दी कि सरकार ने चुनाव कार्यक्रम गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित नहीं किया गया है, लिहाजा पूरी चुनाव प्रक्रिया अवैधानिक है। आरक्षण प्रक्रिया में से भी ज्यादातर में रोटेशन का ध्यान नहीं रखा गया है।

सरकार ने मांगा था वक्त
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता आरडी जैन ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों के बाद कोर्ट से आग्रह किया कि उन्हें इस बिंदु पर जवाब के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने आग्रह स्वीकार करते हुए 17 नवंबर तक जवाब पेश करने निर्देश दिए थे। 

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