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कर्नाटक हाईकोर्ट ने जयललिता की जमानत याचिका खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जयललिता की जमानत याचिका खारिज की

बंगलुरु | कर्नाटक हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आय से अधिक संपत्त‍ि के मामले में बंगलुरु की कोर्ट ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई थी और 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था।
जया के वकील रामजेठमलानी ने कहा कि सुधाकरण की शादी में हुए खर्च को मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं। शादी में हुए खर्च का कुछ हिस्‍सा लड़की वालों की ओर से भी खर्च किया गया है। इसके बाद सभी दोषियों ने अपने बातें रखीं।
उल्लेखनीय है कि अदालत की अवकाश पीठ ने जमानत याचिका को छह अक्तूबर के लिए स्थगित कर दिया था। इसके बाद राम जेठमलानी के नेतृत्व में जयललिता के वकीलों ने मामले में त्वरित सुनवाई के लिए अदालत के रजिस्ट्रार से संपर्क किया, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीएच वघेला ने याचिका को अनुमति दे दी।
यह मामला जब अवकाशकालीन पीठ के समक्ष आया, तो जयललिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने कहा कि अपराध दंड संहिता की धारा 389 के तहत लंबित अपील पर सुनवाई होने तक उनके मुवक्किल की सजा को निलंबित किया जाये और उन्हें जमानत पर रिहा किया जाये। धारा 389 के अनुसार यदि दोषी व्यक्ति की कोई अपील लंबित है, तो अपीली अदालत सजा निलंबित करने का आदेश दे सकती है।
अपनी याचिकाओं में तत्काल जमानत मांगते हुए और अपनी सजा को चुनौती देते हुए जयललिता ने कहा था कि उन पर लगे संपत्ति अर्जित करने के आरोप झूठे हैं और उन्होंने कानून सम्मत साधनों से संपत्ति हासिल की थी। जयललिता ने यह भी तर्क दिया है कि निचली अदालत ने कई फैसलों की अनदेखी की है और बाध्यकारी प्रकृति के कई आयकर आदेशों और आयकर अपील प्राधिकरण के फैसलों पर विचार नहीं किया, जिसने उनके द्वारा बताये गये आय और व्यय के स्तर को स्वीकार कर लिया था।

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