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करन-अर्जुन के शव देखकर बिलख पड़ी माँ

ग्वालियर । अपने दोनों बेटों करन और अर्जुन के शवों को एक साथ लेकर उनका पिता बल्लू बाथम घर पहुंचा तो बेटों के शव देखकर माँ का बुरा हाल था। शव विच्छेदन के बाद शवों के घर पहुंचते ही बच्चों की माँ और अन्य परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल था। रोते हुए परिजन पुलिस एवं प्रशासन को कोस रहे थे। उनका कहना था कि यदि समय पर बचाव कार्य किया जाता तो उनके लाड़लों को बचाया जा सकता था। प्रशासन और पुलिस की लापरवाही ने हमारे बच्चों की जान ली है।
इस बीच मुहल्ले के कुछ लोगों ने दोपहर में मोहल्ले के लोगों एवं रिस्तेदारों ने एकत्रित होकर सड़क पर जाम लगाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस और प्रसासन के समझाने के बाद जाम लगाने का विचार बना रहे लोग मान गए। उल्लेखनीय है सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12:15 बजे गैस सिलेण्डरों से ऑवर लोड एक ट्रक गुप्तेश्वर की ओर जाते हुए चढ़ाई न चढ़ पाने के कारण से पीछे की ओर जाते हुए सड़क से नीचे बनी बल्लू बाथम नामक व्यक्ति की पाटोर पर जा गिरा। पाटोर के अन्दर बल्लू के दोनों बेटे करन और अर्जुन सो रहे थे। दुर्घटना की सूचना तुरंत पुलिस और प्रशसन को दी गई। लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस और बचाव दल सिलेण्डरों से गैस रिसने के कारण मलबे में दबे बच्चों को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं दिखा सका। इस बीच शहर से क्रेन मंगाई गईं जो ट्रक को ऊपर नहीं खींच सकीं। इसके बाद मालनपुर से बड़ी क्रेन मंगाई गई जो घटना के करीब तीन घण्टे के लम्बे इंतजार के बाद घटना स्थल पर पहुंची। इस क्रेन से ट्रक को खींचकर बाहर निकाला गया। इसके बाद ही बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया जहां एक बच्चे को चिकित्सकों ने तुरंत ही मृत घोषित कर दिया जबकि दूसरे बच्चे की सांसें चल रही थीं। उपचार के दौरान रात में इस बच्चे की भी मौत हो गई। दोनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया।

प्रशासन जागता तो न होती घटना
स्थानीय निवासियों का कहना था कि संजय नगर में पहाड़ी से कुछ समय पूर्व भी एक पत्थर से भरा हुआ ट्रक एक मकान पर जा गिरा था। इस घटना में एक लड़की की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन चेत गया होता और इस रास्ते पर भारी एवं क्षमता से अधिक भरे हुए वाहनों को निकलने से रोका होता। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की गई होती या फिर इस क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए सड़क के किनारे मोटी सुरक्षा दीवार बनाई होती तो इस तरह की दर्दनाक घटना नहीं होती और एक माँ को अपने दो बेटे नहीं खोने पकड़े। लोगों का आरोप था कि इस क्षेत्र में पुलिसकर्मी पैसा लेकर क्षमता से अधिक भरे हुए वाहनों को आग निकलने की अनुमति दे देते हैं। इसी की परिणिति इस घटना के रूप में देखने को मिली है। 

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