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तीन महीने मेें खुली कंट्रोल फिर भी नहीं मिला केरोसिन

अशोकनगर | शासन सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने को भले ही कितने प्रयास करे मगर राशन माफिया सुधार करने के लिए कतई तैयार नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की तो बात ही दूर है। शहरी क्षेत्र में भी राशन माफिया गड़बड़ी करने में चूक नहीं रहे हैं। कुछ ही दिनों पहले रातीखेड़ा गांव के लोगों ने शिकायत की थी। अब फिर ग्राम मोहरी राय के उपभोक्ताओं की शिकायत सामने आई है।
शंकरपुर मगरदा में संचालित हो रही शक्तिपुंज महिला बहुउद्देशीय मर्यादित दुकान महीनों में एकाध बार ही खुलती है, वो भी गुपचुप तरीके से। रविवार को भी कंट्रोल कर्मचारी ने चुपचाप दुकान खोल ली एवं उपभोक्ताओं को राशन वितरण करना शुरू किया मगर जिस तरीके से लोगों को उनके हक का राशन दिया जा रहा था, वो ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कंट्रोल संचालक अपनी ओर से खैरात बांट रहा हो, जिससे उपभोक्ताओं ने जमकर हंगामा मचाया। उपभोक्ताओं के मुताबिक जो चावल दिया जा रहा है उसमें आधा गेहूं मिला हुआ है। इसी तरह शक्कर 15 रुपये प्रति किलो दी जा रही है जबकि अन्य कंट्रोल दुकानों पर शक्कर साढ़े 13 रुपये किलो मिल रही है।
फिर भी नहीं मिल रही सामग्री
मोहरीराय से आई राजकुमारी ने बताया कि वह तीन महीने से घासलेट का तेल लेने आ रही है मगर उसे घासलेट नहीं दिया जा रहा है जिससे खाना बनाने और घर में चिमनी,लालटेन जलाने में परेशानी आ रही है। राजकुमारी के मुताबिक आज भी केरोसिन नहीं दिया है जबकि दोपहर में दुकान खुलने की उसे सूचना मिली थी तो वह भागी-भागी अशोकनगर आई। वहीं कलाबाई ओझा ने बताया कि उसका कूपन नं.431 है फिर भी उसे गेहूं-चावल नहीं दिए जा रहे हैं। एक अन्य महिला गुड्डीबाई कुशवाह ने बताया कि पिछले तीन-चार महीने से दुकान नहीं खुली है। आज रविवार के दिन दुकान खोल ली गई जबकि पहले कभी रविवार को दुकान नहीं खोली गई। शक्तिपुंज महिला बहुउद्देशीय मर्यादित शंकरपुर द्वारा संचालित इस कंट्रोल दुकान में ढेरों अनियमितताएं हैं। न तो दुकान पर कहीं स्टॉक लिस्ट है और न ही प्रदान किए जाने वाले राशन की दर प्रदर्शित करने वाला कोई बोर्ड लगा है।
पत्थरों के बांटों से तौल
उपभोक्ताओं को शक्कर 15 रुपये किलो दी जा रही थी। यहीं नहीं राशन तौलने के लिए मानक बांटों के बजाए पत्थरों का उपयोग किया जा रहा था। इस दुकान पर दुकान के खुलने और बंद होने का समय भी कहीं नहीं लिखा था। इतनी सारी अनियमितताएं होने के बावजूद खाद्य अधिकारी कभी इन दुकानों का निरीक्षण नहीं करते हैं जिससे साफ जाहिर है कि कंट्रोल संचालक अधिकारियों से सांठ-गांठ करके राशन की कालाबाजारी करने में लगे हुए हैं। 

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