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कर्नाटक में कांग्रेस बहुमत की ओर, भाजपा को भारी नुकसान

कर्नाटक में कांग्रेस बहुमत की ओर, भाजपा को भारी नुकसान

नई दिल्‍ली | कर्नाटक में कांग्रेस अपना परचम लहराते हुए विधानसभा चुनावों में सात साल के अंतराल के बाद अपने दम पर सत्ता तक पहुंच रही है और उसने दक्षिण भारत के इस राज्य को भाजपा से लगभग छीन लिया है। घोटालों के कारण परेशान भाजपा की स्थिति का फायदा उठाते हुए कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है। 224 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी 113 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव परिणामों में अब तक कांग्रेस 117 सीटों पर विजय पताका लहरा चुकी है। बीजेपी 39 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है, जनता दल (एस) ने 37 सीटों पर जीत हासिल की है जबकि अन्य के खाते में 14 सीट गई है। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का पार्टी छोड़ कर जाना और दक्षिण में भाजपा की पहली सरकार के कार्यकाल में हुआ कथित भ्रष्टाचार सत्तारूढ़ दल की हार के मुख्य कारण रहे। येदियुरप्पा शिकारीपुरा सीट से 15,000 से अधिक मतों से चुनाव जीत गए हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (एस) की राज्य इकाई के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी रामनगर विधानसभा सीट से 25,000 से अधिक मतों से जीत गए। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और भाजपा की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष के एस ईश्वरप्पा शिमोगा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए और तीसरे स्थान पर रहे। पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा ने इस दक्षिणी राज्य में अपने दम पर सरकार बनाई थी। यह दक्षिण भारत के किसी राज्य में भाजपा की पहली सरकार थी। तब भाजपा को 110 सीटें, कांग्रेस को 80 सीटें और जद (एस) को 28 सीटें मिली थीं। कुल 224 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 113 सीटें जरूरी होंगी। मतदान 223 सीटों पर हुआ है क्योंकि मैसूर जिले की पेरियापटना विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार की मौत के चलते मतदान की तारीख बढ़ा दी गई है। वहां 28 मई को मतदान होगा। केजेपी ने कई विधानसभा सीटों पर भाजपा के मतों में सेंध लगाई जिससे सत्तारूढ़ दल को नुकसान हुआ है। कांग्रेस की इस जीत के बीच उसे एक झटका उस समय लगा जब कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के दावेदार जी परमेश्वर कराटगेरे विधानसभा सीट पर 18,000 से अधिक मतों से हार गए। दक्षिणी राज्य में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए तैयार है और मुख्यमंत्री पद के लिए दौड़ तेज हो गई है। इस पद के लिए राज्य के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री एम मल्लिकार्जुन खड़गे तथा राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्दरमैया के बीच मुकाबला बताया जाता है।
सरकार का कार्यकाल खत्म होते होते सीपी योगीश्वर ने भी जगदीश शेट्टार मंत्रिमंडल छोड़ कर समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जद (एस) की प्रत्याशी अनिता कुमारस्वामी को करीब 6,500 मतों के अंतर से हरा कर चन्नपाटा सीट से जीत दर्ज की। अनिता जद (एस) की राष्‍ट्रीय इकाई के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी की पत्नी हैं। पिछले साल भाजपा से किनारा कर क्षेत्रीय दल बनाने वाले येदियुरप्पा की पार्टी केजेपी केवल पांच सीटें ही जीत पाई और एक पर यह आगे है। लेकिन उसने भाजपा को कई विधानसभा सीटों में भारी नुकसान पहुंचाया। खुद येदियुरप्पा शिमोगा जिले की शिकारपुरा सीट से पुनर्निर्वाचित हो गए। एक ओर जहां भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेरने में उनकी अहम भूमिका रही, वहीं दूसरी ओर उनकी नई नवेली पार्टी को निराशाजनक नतीजे मिले, जिससे खुद येदियुरप्पा की किंगमेकर बनने की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कर्नाटक के परिणाम पर संतोष व्यक्त किया है। मनमोहन सिंह ने दिल्ली में कहा कि कांग्रेस की विजय भाजपा की विचारधारा के विपरीत आया नतीजा है। कर्नाटक के नतीजे ने यह साबित कर दिया है कि देश की जनता जानती है कि कौन क्या है तथा उन्होंने भाजपा की विचारधारा को नकार दिया है।
कर्नाटक में 2008 में सत्ता में आई भाजपा को दक्षिण भारत में तेजी से आगे बढ़ने की आशा थी, लेकिन उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस 2004 तक अपने दम पर कर्नाटक की सत्ता पर काबिज रही है। उसके बाद फरवरी 2006 तक इसने जद (एस) के साथ सरकार चलाई। लेकिन इसके बाद सत्ता जद (एस) और भाजपा के हाथों चली गई थी।

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