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लाड़ली लक्ष्मी के हाथ खाली

भिण्ड | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर प्रशासनिक कारिन्दों द्वारा जिस तरह पलीता लगाया जा रहा है उसका सबसे बड़ा उदाहरण लाड़ली लक्ष्मी योजना है। जिसको धरातल पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी महिला बाल विकास विभाग की है, जो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहा है। ऐसा ही एक मामला भिण्ड शहर के वार्ड क्र. 32 महावीर गंज निवासी विजय प्रताप सिंह कुशवाह ने उजागर किया है, उनकी पुत्री कृति कुशवाह को 2008 से अब तक पहली ही एन.एस.सी. दिसम्बर 2009 में मिली है, दूसरी के लिए उनको काफी मशक्कत करनी पड़ी, जबकि नियमानुसार अब तक चार एन.एस.सी. मिल जाना चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत राशि प्रदाय करने के नियमानुसार प्रकरण स्वीकृति उपरांत हितग्राही के नाम पर लगातार पांच वर्षों तक छह हजार रुपए के राष्ट्रीय बचत पत्र प्रदाय कर कुल 30 हजार राशि की एन.एस.सी. पांच वर्ष में मिल जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। जब हितग्राही द्वारा शिकायत की गई तब उसे तीन साल बाद दूसरी एन.एस.सी. मिली है। वार्ड क्र. 32 महावीर गंज निवासी विजयप्रताप सिंह कुशवाह ने एकीकृत महिला बाल विकास विभाग शहरी को 27 अप्रैल 13 को पत्र लिखा, जिस पर उन्हें दूसरी एन.एस.सी. जो 13 फरवरी 2013 को बनी जो में प्राप्त हुई। अब प्रश्न यह उठता है कि जब डाकघर ने एन.एस.सी. 13 फरवरी 2013 को जारी की है, जबकि यह एन.एस.सी. 2010 में जारी होनी चाहिए थी, अब तीन वर्ष के व्याज कर क्षतिपूर्ति विभाग कैसे करेगा या फिर इसका खामियाजा हितग्राही को भुगतना होगा, यह तो समय आने पर ही पता चलेगा, लेकिन महिला बाल विकास विभाग की यह घोर लापरवाही है कि इस तरह के न जाने और कितने प्रकरण होंगे जो हितग्राही की जागरुकता के अभाव में ठण्डे बस्ते में पड़े होंगे।

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