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'लंबित मामलों को निपटाने के लिए और न्यायाधीशों की जरूरत: प्रधानमंत्री

लंबित मामलों को निपटाने के लिए और न्यायाधीशों  की जरूरत:  प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि लैंगिक मुद्दों पर न्यायपालिका को संवेदनशील बनाए जाने की जरूरत है। इसके साथ लंबित मामलों की संख्या घटाने और मामलों के निपटारे में विलम्ब को दूर करने के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। यह बातें प्रधानमंत्री ने रविवार को राजधानी दिल्ली में न्यायिक व्यवस्था में सुधार पर आयोजित जजों और मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के दौरान कही।
देश में जनसंख्या के लिहाज से वर्तमान में न्यायाधीशों के अनुपात को पूरी तरह अपर्याप्त करार देते हुए प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आश्वासन दिया कि तीन करोड़ से अधिक लंबित मुकदमों पर ध्यान देने के लिहाज से निचली न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए केंद्र से और अधिक धन दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘फिलहाल प्रति दस लाख जनसंख्या पर 15.5 न्यायाधीशों का अनुपात पूरी तरह अपर्याप्त है। हमें इस समीकरण को बदलने की जरूरत है ताकि मामलों के लंबित होने और उन्हें निपटाने में विलंब के मुद्दों पर ध्यान दिया जा सके।’’ मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने की। प्रधानमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश की बात का समर्थन करते हुए कहा, 'मैं अल्तमस कबीर की बात से सहमत हूं कि लोगों को न्याय दिलाने के लिए जजों की संख्या बढ़ाने की ज़रूरत है।' उन्होंने कानूनों के आम लोगों पर होने वाले असर पर बात करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि जो क़ानून लोगों की रोज़मर्रा के जीवन पर असर डालते हैं वह तार्किक और स्थाई होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए ये भी कहा कि सरकारों को मानवाधिकारों की इज़्जत और रक्षा करनी चाहिए। मनमोहन सिंह ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों का विशेष ज़िक्र किया। फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे कदम उठाए गए हैं लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध कम करने के लिए और कदम उठाए जाने की ज़रूरत है। इस सम्मेलन में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, कानून सचिव, सुप्रीम कोर्ट के सभी जज और 24 हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीशों को आमंत्रित किया गया है। पिछली बार ऐसा सम्मेलन 2009 में हुआ था।

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