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लापता बच्चों के मामले में गंभीर नही केंद्र, राज्य सरकारे: सर्वोच्च न्यायालय

लापता बच्चों के मामले में गंभीर नही केंद्र, राज्य सरकारे: सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली | सर्वोच्च न्यायालय ने लापता बच्चों पर यथास्थिति रिपोर्ट दायर करने में असफ़ल रहे केंद्र और राज्य सरकारों को फ़टकार लगाई है। सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों सरकारों के उदासिन रवैये की कड़ी आलोचना करने हुए कहा है कि इस गंभीर मसले की किसी को भी चिंता नही है।
सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात, तमिलनाडु और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यसचिवों की अदालत में अनुपस्थिति पर घोर नाराजागी जताई। तीनों राज्यों के मुख्यसचिवों को, लापता बच्चों पर यथास्थिति रिपोर्ट सौंपने के लिए जारी एक नोटिस का जवाब देने में विफल रहने का कारण स्पष्ट करने के लिए अदालत में उपस्थिति होने के लिए कहा गया था। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर ने तीनों मुख्यसचिवों द्वारा न्यायालय के निर्देश का उल्लंघन करने पर सख्त नाराजगी जताई।
नाराज न्यायालय ने पूछा कि क्या तीनों को पेश होने के लिए उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करने पड़ेंगे। न्यायमूर्ति कबीर ने सम्बंधित राज्यों की तरफ से पेश हुए वकीलों को फटकार लगाते हुए कहा, "आप क्या समझते हैं कि हम सिर्फ आदेश पारित करने के लिए आदेश पारित करते हैं।"
गैर सरकारी संगठन, बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता, एच. एस. फुल्का ने न्यायालय को बताया कि हर दिन लापता होने वाले 100 बच्चों के बारे में पता नहीं चल पाता। इस पर न्यायमूर्ति कबीर ने कहा, "लगता है कि लापता बच्चों की पीड़ा की चिंता किसी को नहीं है। यह हास्यस्पद है।"
न्यायालय ने तीनों मुख्यसचिवों को 19 फरवरी को अगली सुनवाई के दौरान अदालत में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थिति होने का निर्देश दिया और गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा सामाजिक न्याय मंत्रालय को याचिका के जवाब में हलफनाम दायर करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने 17 जनवरी के अपने आदेश में गुजरात, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, गोवा और ओडिशा के मुख्यसचिवों को निर्देश दिया था कि वे लापता बच्चों पर दायर एक जनहित याचिका पर न्यायालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब देने में विफल रहने का कारण स्पष्ट करने के लिए न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर पेश हों।
गैर सरकारी संगठन, बचपन बचाओ आंदोलन ने अपने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि जनवरी 2008 से लेकर जनवरी 2010 के बीच 1.7 बच्चे लापता हुए। इनमें बहुत बच्चों की देह व्यापार और बाल श्रम के लिये तस्करी की गयी।
राष्ट्रीय अपराध अन्वेषण विभाग ने जारी किये आकड़ों का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि इस काल में 392 जिलों में 1,17,480 बच्चें लापता हुए जिनमें 41,546 बच्चों का अब तक कोई सुराग नही मिल पाया है।

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