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लड़कियां मायका, ससुराल व समाज चलाती हैं,गिरते हुए शिशु लिंगानुपात को रोकने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका विषय पर कार्यशाला आयोजित

लड़कियां मायका, ससुराल व समाज चलाती हैं,गिरते हुए शिशु लिंगानुपात को रोकने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका विषय पर कार्यशाला आयोजित

भिण्ड | लड़कियां मायके से लेकर ससुराल $img_titleऔर समाज को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अगर लड़कियां नहीं होंगी तो इन तीनों के निर्माण की नींव की कल्पना नहीं की जा सकती है। जिलाधीश अखिलेश श्रीवास्तव ने यह बात गिरते हुए शिशु लिंगानुपात को रोकने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका विषय पर आयोजित जनप्रतिनिधियों की कार्यशाला में कही। इसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और मप्र वालन्ट्री हेल्थ ऐसोसिएशन ने मिलकर किया था। कार्यशाला का संचालन भागवंती बाई शिक्षा प्रसार समिति के संचालक शशिकांत शर्मा ने किया। कार्यशाला में प्रमुख रूप से मेहगांव नगर परिषद अध्यक्ष कमलेश जैन, मिहोना नगर परिषद अध्यक्ष संतोष बौहरे, लहार नगर परिषद अध्यक्ष सुशीला तिवारी, जिला पंचायत सदस्य रजनी श्रीवास्तव व केशव सिंह जादौन मौजूद रहे। जिलाधीश ने समाज में बच्चियों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए लोगों में जागरुकता लाने के उपाए सुनिश्चित करने के लिए जनप्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि समाज की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। अगर वे समाज में लड़कियों के संरक्षण और उनके हित की बात को एक मुद्दे के रूप में लोगों के सामने रखेंगे, तो वे निश्चित रूप से न सिर्फ उनकी बात सुनेंगे, बल्कि उनकी बात को मानने को भी तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज में जनप्रतिनिधियों की बातों का लोगों पर अच्छा असर होता है। इसलिए बच्चियों के संरक्षण के काम को जनप्रतिनिधि आगे आकर पूरा करें और यह काम दिल और दिमाग से करें, तो इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि बेटियों के संरक्षण के लिए सिर्फ कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि बेटियों और महिलाओं के संरक्षण और उनकी तरक्की के लिए समाज में पहले से ही बहुत से कानून बने हुए हैं। लेकिन आज बच्चियों के संरक्षण के लिए लोगों की सोच और मानसिकता को बदलने की जरूरत है। इसमें जनप्रतिनिधि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों की संख्या का अनुपात बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए जनप्रतिनिधि ज्योति से ज्योति जलाते चलें। यह ज्योति एक से दूसरे और दूसरे से तीसरे और फिर इसी तरह हर गांव, हर गली एवं मोहल्ले तक जगाई जाए। निश्चित रूप से इस अलख जगाने के सुखद परिणाम हमारे सामने आएंगे। कार्यशाला में विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बेटियों की संख्या बढ़ाने और संरक्षण के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव रखे। जनप्रतिनिधियों ने भी बेटियों के संरक्षण के लिए विभिन्न सुझाव देते हुए उनके हित में समाज में जागरुकता लाने में अपना भरपूर सहयोग देने का भरोसा दिलाया। वक्ताओं ने समाज में बच्चियों के सुरक्षित पालन-पोषन और उनको बढ़ावा दिए जाने पर बल दिया।

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