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अफजल की दया याचिका पर टिप्पणी से प्रणव का इनकार

नई दिल्ली। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि वह 2001 में संसद पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका पर तबतक टिप्पणी नहीं करेंगे, जबतक कि वह पदभार ग्रहण करने के बाद मामले का अध्ययन नहीं कर लेते।

मुखर्जी ने एक टीवी चैनल के साथ एक बातचीत में कहा, 'मैं जबतक पदभार ग्रहण नहीं कर लेता और इस मुद्दे की स्टडी नहीं कर लेता, मैं अफजल गुरु पर टिप्पणी नहीं कर सकता।' गौरतलब है कि प्रणव एक दिन पहले ही देश के 13वें राष्ट्रपति के रूप में भारी वोटों से निर्वाचित हुए हैं।

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब शिवसेना ने मांग की है कि उन्हें गुरु की दया याचिका खारिज कर देनी चाहिए। राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने मुखर्जी का समर्थन किया था। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने पार्टी मुखपत्र सामना में कहा था, 'आपसे हमारी कई अपेक्षाएं हैं। हम आपसे आग्रह करते हैं कि अफजल गुरु की दया याचिका खारिज कर दें और उसे फांसी पर लटका दें। प्रणव दा आपको इस काम को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए और देश के राष्ट्रपति के रूप में अपना करियर शुरू करना चाहिए। हम आपसे इसकी अपेक्षा करते हैं।'

प्रणव को राष्ट्रपति चुनाव में न केवल सत्ताधारी कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए के घटकों का समर्थन मिला, बल्कि जेडीयू और शिव सेना जैसे दलों ने अपने गठबंधन से बाहर जाकर प्रणव का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'मैं खास से इस बात से खुश हूं कि जो लोग हमारी पार्टी से संबंधित नहीं हैं और उन्होंने वादा किया था, उन सभी ने अपना वादा निभाया और मुझे वोट दिया। सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता। मैं इसे अपने सार्वजनिक जीवन को एक बड़ा पुरस्कार मानता हूं।' उन्होंने कहा, 'मिरती से रायसीना हिल तक का एक लंबा सफर रहा है। मैं बचपन में बहुत शैतान था। मैं हमेशा मुश्किल से जूझता रहता था।'

प्रणव बुधवार को शपथ ग्रहण करेंगे और उसके बाद राष्ट्रपति भवन जाकर देश के राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करेंगे।


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