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अन्ना ने फिर लिखी प्रधानमंत्री को चिट्ठी

अन्ना ने फिर लिखी प्रधानमंत्री को चिट्ठी


$img_titleमुंबई।
सरकार और प्रधानमंत्री द्वारा अपनी मांगें अनसुनी करने के बावजूद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक और पत्र भेजा। अन्ना ने इसमें प्रधानमंत्री को संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज पर सरकार द्वारा किए गए उस हस्ताक्षर की याद दिलाई है, जिसमें सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी सख्त कदम उठाने का वादा किया था।


वर्ष 2003 में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने कहा था कि भ्रष्टाचार बहुत हानिकारक और सभी स्तरों पर समाज को नुकसान पहुंचाने वाली घातक बीमारी है। इसके कारण लोकतंत्र और कानून व्यवस्था का ह्वास होता है। सामहिक अपराध को बढ़ावा मिलता है और आतंकवाद व मानव जीवन को खतरा पहुंचाने वाली अनेक प्रवृत्तिायों को बढ़ावा मिलता है। अन्ना के अनुसार उक्त सम्मेलन में उक्त सभी बातों पर सहमति जताते हुए सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी मसौदे पर हस्ताक्षर किया था और भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा किया था।

अन्ना ने पत्र में भ्रष्टाचार उन्मूलन के उपाय सुझाने के लिए 1993 में गठित एनएन वोरा समिति की रिपोर्ट का भी जिक्र किया है। इस रिपोर्ट में भी भ्रष्टाचार के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि देश के विभिन्न भागों में आपराधिक गिरोह, पुलिस, नौकरशाह और राजनेताओं के बीच साठगांठ चल रही है, जिसका नुकसान देश को उठाना पड़ रहा है। अन्ना ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे अपनी व्यवस्तता के बीच थोड़ा समय निकाल संयुक्त राष्ट्र के उस मसौदे और वोरा समिति की सिफारिशों को दोबारा पढ़े और उन पर अमल करवाएं।

महाराष्ट्र के नेताओं से मिल रहे

अन्ना बुधवार शाम मुंबई पहुंचे। यहां वह अगले दो-तीन दिनों तक विभिन्न दलों के नेताओं से मिलकर महाराष्ट्र में पहले से काम कर रही लोकायुक्त प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए समर्थन जुटाएंगे। इसी उद्देश्य से वह एक मई से राज्यव्यापी दौरा करने वाले हैं। अन्ना ने बुधवार को रिपब्लिकन पार्टी के नेता रामदास अठावले से मुलाकात की। उनकी मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, गृह मंत्री आरआर पाटिल और विधान परिषद में नेता विरोधी दल विनोद तावड़े से भी मिलने की योजना है।

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