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लोकतंत्र में अभिव्यक्ति का हिस्सा है व्यंग्य

लोकतंत्र में अभिव्यक्ति का हिस्सा है व्यंग्य


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कच्छ। व्यंग्यात्मक कोलाज बनाकर गिरफ्तार हुए बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के मामले में पूर्व रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि व्यंग्य लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। सभी को अपनी अभिव्यक्ति का हक है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यंग्य का कार्टून आपकी छवि को नष्ट नहीं कर सकता है। लोगों की सोच किसी की छवि को बनाती या बिगाड़ती है।


उल्लेखनीय है कि त्रिवेदी को रेलमंत्री पद से हटाने की प्रक्रिया उक्त कोलाज में दर्शायी गई है और पूर्व रेलमंत्री उक्त व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति का एक हिस्सा हैं। तृणमूल नेता त्रिवेदी इन दिनों गुजरात के दौरे पर हैं।

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का व्यंग्यात्मक कोलाज बनाने और उसे इंटरनेट पर डालने के मामले में फंसे जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्र ने अपने साथ हुई मारपीट मामले में शुक्रवार रात पूर्व यादवपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्रोफेसर की शिकायत पर पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके शनिवार को अदालत में पेश किया, जहां उन्हें पांच-पांच सौ रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। मारपीट करने वालों पर जमानती धाराएं लगाने के चलते पुलिस की भूमिका पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रोफेसर अंबिकेश के बनाए कोलाज में ममता के साथ रेलमंत्री मुकुल रॉय और पूर्व रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी भी थे। इसी के बाद गुरुवार रात तृणमूल कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर के घर पहुंचकर उनकी पिटाई की और पकड़कर थाने ले गए। पुलिस ने थाने में प्रोफेसर को रात भर बैठाए रखा और शुक्रवार सुबह मुकदमा दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया। प्रोफेसर की मदद के आरोप में उनके पड़ोसी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

अदालत ने दोनों को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया था। घर पर पिटाई करने वालों के खिलाफ प्रोफेसर ने प्राथमिकी दर्ज कराई। गिरफ्तार किए गए तृणमूल कार्यकर्ताओं के नाम अरूप मुखर्जी, अमित सरदार, शेख मुस्तफा और निशिकांत घरुई हैं।

प्रोफेसर अंबिकेश ने जान का खतरा बताते हुए पुलिस से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया है।

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