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अन्ना के आदोलन की काट में जुटी काग्रेस

अन्ना के आदोलन की काट में जुटी काग्रेस


$img_titleनई दिल्ली।
अन्ना फिर जंतर-मंतर पर हैं, लेकिन इस दफा काग्रेस किसी तरह के तनाव में नहीं है। काग्रेस का एक वर्ग मौजूदा चुनाव नतीजों को टीम अन्ना के निष्प्रभावी होने के तौर पर भी पेश कर रहा है। वहीं पार्टी इस दफा उन्हें जनता की सहानुभूति बटोरने का भी कोई मौका नहीं देना चाहती। यही कारण है कि विदेश रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मजबूत लोकपाल विधेयक को राज्यसभा से भी पारित कराने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाकर अपनी तरफ से प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अब अन्ना के एक दिनी अनशन को काग्रेस ने अपने खिलाफ बताने से भी इंकार किया और कहा कि इसका उन्हें हक है, लेकिन कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है।

काग्रेस के इन तेवरों का प्रमुख कारण सर्वदलीय बैठक में टीम अन्ना के लोकपाल में प्रस्तावित लोकायुक्त कानून के खिलाफ सभी दलों का खड़ा हो जाना भी है। काग्रेस इस दफा पूरी कोशिश कर रही है कि अन्ना का अनशन सिविल सोसाइटी बनाम संप्रग की लड़ाई में किसी भी तरह तब्दील न हो सके। वह इस दफा दबाव में भी नहीं दिखना चाहती। इसीलिए, केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और पार्टी प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि कानून बनाना संसद का काम है।

जायसवाल ने कहा, सरकार मजबूत लोकपाल बनाने पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने खुद सर्वदलीय बैठक कर जल्द से जल्द सख्त लोकपाल लाने की पहल की है। सरकार पूरी कोशिश कर रही है। संसद से मजबूत लोकपाल विधेयक कम से कम समय में पारित कराने के प्रति हम आशावान हैं। काग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी का कहना था, अन्नाजी को अनशन करने का अधिकार है। किस तरह का कानून बनेगा, इसे कैसे बनाया जाएगा, इन मुद्दों पर निर्णय संसद करेगी न कि कोई व्यक्ति। संसद वही कानून बनाती है जो वह उपयुक्त समझती है।

अल्वी ने दो टूक कहा कि मजबूत लोकपाल को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। हर कोई जानता है कि राज्यसभा में हमारा बहुमत नहीं है। इसलिए संसद में कानून पारित कराने के लिए हम सभी दलों को काग्रेस के साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। अन्ना के अनशन पर बैठने के प्रभाव को अल्वी ने खारिज किया और कहा, अन्ना हजारे के अनशन का कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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