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लक्ष्मी प्राप्ति के लिये ऐसे करें पूजन

लक्ष्मी प्राप्ति के लिये ऐसे करें  पूजन

दीपों का यह त्यौहार विधिपूर्वक लक्ष्मीपूजन कर आप अपने भविष्य को नई आभा सुख समृद्घि एवं यश प्राप्त कर सकते हैं। पर्व की शुभ कामनाओं के साथ सरल पूजन विधि सादर समर्पित है-
१. शुभ मुहुर्त-स्थिर लग्न चौघडिय़ा व होरा अनुसार
प्रात: 8.43 से1.42 तक, दोपहर 2.56 से 4.18 तक, सायं 5.40 से 8.46 तक, रात्रि 10.35 से 1.50 तक व मध्य रात्रि 3.43 से 6.43 तक
२. पूजन सामग्री-लक्ष्मीजी का पाना, चांदी का सिक्का, श्री यंत्र, श्रीफल, नवीन लाल वस्त्र, कमल का फूल, कुमकुम, सिंधुर, अबीर गुलाल, अक्षत, रोली (लच्छा), मेहंदी, हल्दी, धुप, दीपक अगरबत्ती, पुष्प, पुष्पमाला, फल, पंच मेवा, पंचामृत, इत्र, जनेउ, खील पताशे, गन्ना, पुजा पान, लोंग, इलायची आदि।
३. आसनशुद्घि-सर्वप्रथम पूर्वाभिमुख या उत्तराधिमुख होकर प्राणायाम करके तीन बार आचमन करें और बोलें - ऊँ नारायण नम: स्वाहा, ऊँ माधवाय नम: स्वाहा, ऊँ केशवाय नम: स्वाहा, कहकर जल पी लें। हाथ धोते हुए ऊँ हृषिकेशाय नमो नम: बोले। सामग्री पर व अपने ऊपर चारों ओर जल छिडक़ें। ऊँ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु वाक्य बार-बार कहें। दीप प्रज्जवलित करें।
४. संकल्प- सीधे हाथ में जल व अक्षत लेकर संकल्प करें। ऊँ श्री गणेशाय: नम:, हरि ऊँ आज परम मंगल को देने वाली कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या दीपोत्सव तिथी मंगलवार को मैं ....... गौत्र ..... अपने परिवार सहित शारीरिक एवं मानसिक दोषों को दूर करने के लिये एवं कल्याण, सुख, समृद्घि, स्वास्थ्य लाभ, विघ्न नाश के लिये श्री गणपति नवग्रह महाकाली, महालक्ष्मी, कुबेर आदि पूजन का संकल्प करता हूं। जल गणेशजी के समीप छोड़ दें। मस्तक पर तिलक लगायें लच्छा बांधे। समृद्घि के लिये मन ही मन प्रार्थना करें। श्री गणेश जी का ध्यान करें, पूजन करें व बोले ऊँ श्री गणेशाय नम: आहवानम्, आसनम्, पाद्यम्, अध्र्य, स्नानम्, वस्त्रम्, गंद्यम्, अक्षतान्, पुष्पम्, धुम्, दीपम्, नेवेद्यम्, आचमनीयम्, ताम्बुल, पत्रम्, पूंगी फलम् दक्षिणाम् समरपयामी।
इसी प्रकार कलश, नवग्रह, कुल देवी-देवता, कुबेर का महालक्ष्मीजी का पूजन करें ध्यान करें। महालक्ष्मी पूजन में चांदी का सिक्का या श्रीयंत्र को थाल में रखें, लक्ष्मीजी का ध्यान करें, आह्वान करें, अक्षत चढ़ायें, जल के द्वारा तीन बार अघ्र्य देवें, जल, पंचामृत व शुद्घ जल से स्नान करायें। वस्त्र (लच्छा) अर्पण करें व बोले ऊँ भूं भूर्व स्व: श्री महालक्ष्मी नम: .....(वस्तु का नाम लेकर) समरपयामी।
अंग पूजा-हाथ में पुष्प लेकर ऊँ चपलाये नम:, ऊँ चंचलाये नम:, ऊँ कमलाये नम: ऊँ कात्यायिन्ये नम:, ऊँ जगन्माते नम:, ऊँ विश्ववल्लभाये नम:, ऊँ कमलवासिन्ये नम:, ऊँ पद्म कमलाये नम:, ऊँ कमलपत्राक्ष्यै नम:, ऊँ श्रियै नम: कहकर पुष्प रख दें।
अष्टसिद्घी पूजन-पूर्वादिक्रम से आगे दिशाओं में खील (धानी) सहित अक्षत फेंके और बोले, ऊँ अणिम्नै नम:, ऊँ महिम्ने नम:, ऊँ गरिम्णे नम:, ऊँ लधिम्ने नम:, ऊँ प्राप्तये नम:, ऊँ प्राकम्ये नम:, ऊँ इशिताये नम:, ऊँ वशिताये नम:। अष्ट लक्ष्मी पूजन-ऊँ आद्यलक्ष्म्ये नम:, ऊँ विद्यालक्ष्म्ये नम:, ऊँ सौभाग्य लक्ष्म्ये नम:, ऊँ अमृत लक्ष्म्ये नम: ऊँ कामलक्ष्म्ये नम:, ऊँ सत्यलक्ष्म्ये नम:, ऊँ भोगलक्ष्म्ये नम:, ऊँ योग लक्ष्म्ये लम:।मिष्ठान के पांच ग्रास कौर बनाकर मां के सम्मुख एक-एक ग्रास रखते हुए कहें, ऊँ प्राणाय स्वाहा, ऊँ उदानाय स्वाहा, ऊँ अपानाय स्वाहा, ऊँ व्यानाय स्वाहा, ऊँ समानाय स्वाहा।
मिठाई प्रसाद अर्पण कर पान पर लोंग ईलायची चढ़ायें व प्रार्थना करें।
नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुर पुजीते शंक चक्र गदाहस्ते महालक्ष्म्ये नमोस्तुते।
अपने उपकरणों की भी पूजा करें ‘ऊँ महाकालेय नम: बोलकर आरती, पुष्पांजलि करें व क्षमा याचना करें।
श्री गणेशजी व लक्ष्मीजी को छोडक़र समस्त देवी देवताओं का विसर्जन करें व परिजनों को प्रणाम कर आशीर्वाद लेवें।
विशेष-पूजन के बाद लक्ष्मीजी का बीज मंच श्री सुक्त का रात्रि में सपरिवार बैठकर जाप करें क्योंकि यह रात्रि लक्ष्मीजी की रात्रि है, इस रात्रि में मंत्र जप करने से पूरे वर्ष भर धन धान्य की कमी नहीं रहती, रात्रि में लक्ष्मी बरसती है और जागते हुए इसकी उपासना करते हैं। उन पर विशेष कृपा करती है। अत: प्राणी मात्र को मंत्र जप करते हुए जागरण अवश्य करें।
मंत्र! ‘ऊँ श्रीं ऊँ ऐं श्रीं हीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा’


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