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लव-कुश का जन्मदिन मनाया

लव-कुश का जन्मदिन मनाया


ग्वालियर |
गांधी प्राणी उद्यान में वन्य प्राणी सप्ताह के दूसरे दिन बुधवार को सफेद बाघिन यमुना के शावक लव-कुश का पहला जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर महापौर समीक्षा गुप्ता ने शहर के सैंकड़ों बच्चों एवं प्रेरणा स्कूल के मंदबुद्वि बच्चों के साथ केक काटकर टॉफी व मिठाईयां तथा केक का वितरण किया। महापौर ने कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि गंाधी प्राणी उद्यान में आज जमुना बाघिन के दोनों शावकों लव कुश का जन्म दिन है। पिछले वर्ष नामकरण के समय मुझे उनके नामों की घोषणा करने का अवसर प्राप्त हुआ था और आज ठीक एक साल बीत गया। गांधी प्राणी उद्यान में लव-कुश का जन्मदिन मनाने के लिए महापौर के साथ एम.आई.सी. सदस्य लक्ष्मी दिवाकर शर्मा, पुष्पा शर्मा, रामअवतार शाक्य, गंगादेवी प्रकाश टेलर, नेता प्रतिपक्ष शम्मी शर्मा, पार्षदगण पुरूषोत्तम भार्गव, कृष्णराव दीक्षित, केशकली जाटव एवं अपर आयुक्त एम.एल.दौलतानी व शिवराज वर्मा सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, शिक्षक भी उपस्थित थे। चिडिय़ाघर प्रभारी डॉ. एस.के. मित्तल की देखरेख में लव-कुश के जन्मदिन के लिए 15 पोंड का स्पेशल केक बनवाया गया था जिसे सभी अतिथियों ने बच्चों के साथ काटा। वन्य प्राणी सप्ताह के तीसरे दिन 4 अक्टूबर को स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन सुबह 9 बजे से होगा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी बच्चों को गांॅधी प्राणी उद्यान में अपनी ड्राइंग किट के साथ निर्धारित समय से 30 मिनट पूर्व उपस्थित होना होगा। ड्राइंग सीट गांॅधी प्राणी उद्यान द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। नगर निगम द्वारा वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान बच्चों के लिये चिडिय़ाघर में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है।
इसी प्रकार, उन्नत चेतना की अवस्था से दूसरों की त्रुटियां नजर नहीं आती। परन्तु जमीन आकर गड्ढों को (दोषों को) देख सकते हो. और गड्ढों को भरना चाहते हो तो उन्हें देखना ही होगा। हवा में रहकर तुम घर नहीं बना सकते। गड्ढों को देखे बिना, उनको भरे बिना, कंकड़-पत्थर हटाए बिना, जमीन को नहीं जोत सकते।
इसीलिए जब तुम किसी से प्रेम करते हो और उनमें दोष ही दोष देखते हो तो उनके साथ रहो और गड्ढे भरने में उनकी मदद करो। यही ज्ञान है। तुम किसी को प्यार क्यों करते हो? क्या उनके गुणों के लिए या मित्रता और अपनेपन के कारण? अपनत्व महसूस किए बिना, केवल उनके गुणों के लिए, तुम किसी से प्रेम कर सकते हो!
इस प्रकार का प्रेम प्रतिस्पर्धा और ईष्र्या पैदा करता है। परन्तु जब प्रेम आत्मीयता के कारण होता है, तब ऐसा नहीं होता। जब तुम किसी को उनके गुणों के लिए चाहते हो और जब उनके गुणों में बदलाव आता है, या जब तुम उनके गुणों के आदी हो जाते हो, तुम्हारा प्रेम भी बदल जाता है। परन्तु प्रेम यदि अपनत्व के भाव से है, क्योंकि वे तुम्हारे अपने हैं, तब वह प्रेम जन्म-जन्मान्तरों तक रहता है।
लोग कहते हैं, मैं ईश्वर से प्रेम करता हूं क्योंकि वे महान है। और यदि यह पाया जाए कि ईश्वर साधारण हैं, हमारे जैसे ही एक व्यक्ति, तब तुम्हारा प्रेम समाप्त हो जाएगा। यदि तुम ईश्वर से इसलिए प्रेम करते हो क्योंकि वे तुम्हारे अपने हैं, तब वे चाहे जैसे भी हों, चाहे वे रचना करें या विनाश, तुम फिर भी उन्हें प्रेम करते हो। अपनेपन का प्रेम स्वयं के प्रति प्रेम के समान है।


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